नवाजुद्दीन के रामलीला में मारीच का रोल अदा करने की चर्चा कस्बे तथा देहात क्षेत्र में फैल गई थी और लोग उनको स्टेज पर देखने के लिए उत्सुक थे। उन्होंने रामलीला के कलाकारों के साथ अपनी रिहर्सल आरंभ कर दी थी। कार्यक्रम से एक दिन पहले कस्बा निवासी शिवसेना के पदाधिकारी मुकेश शर्मा ने शिव सैनिकों की मीटिंग कर इसके विरोध की चेतावनी दे डाली थी।
तब पुलिस प्रशासन ने रामलीला कमेटी वालों को नवाजुद्दीन से अभिनय न करवाने का सुझाव दिया। विरोध को देखकर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने भी इससे इन्कार कर दिया। कमेटी के पदाधिकारियों के आग्रह के बाद भी नवाजुद्दीन राजी नहीं हुए। उन्होंने विनम्रता के साथ हालात से समझौता कर लिया था, लेकिन वादा किया था कि इस बार नहीं तो फिर कभी अभिनय अवश्य करेंगे।
रामलीला कमेटी के प्रधान अरविन्द गोयल व विनीत कात्यान ने पूछे जाने पर बताया कि नवाजुद्दीन किसी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं। वे इस वर्ष भी नहीं आ सकेंगे। कस्बे व देहात के लोग एक बार नवाजुद्दीन सिद्दीकी को रामलीला के स्टेज पर देखना चाहते हैं। उधर, नवाजुद्दीन सिद्दीकी के भाई फैजुद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि रामलीला प्रदर्शन आरंभ होने से काफी समय पहले रामलीला कमेटी उन्हें निमंत्रण पत्र देगी तो नवाज समय निकालकर कभी भी कस्बे में रामलीला में रोल अदा करने के लिए जरूर आऐंगे।
दम तोड़ गया रामलीला का मंचन
नगर की रामलीलाओं का मंचन करीब दो दशक पहले दम तोड़ गया था। वीर रस के लिए विख्यात चरथावल की रामलीला का विलुप्त होना कलाकारों को टीसता है। कलाकारों का मानना है कि भारतीय संस्कृति की परिचायक रामलीला के दम तोड़ने के पीछे नई पीढ़ी की बेरूखी और टीवी चैनलों के चलन प्रमुख हैं।
रामलीला के विलुप्त होने के कारणों पर पूर्व संचालकों एवं कलाकारों के मन का टटोला गया। दशकों पूर्व बंद हो चुकी लीला पर ठाकुरद्वारा मंदिर रामलीला के प्रमुख कलाकार रहे सत्यप्रकाश धीमान को मलाल है। बकौल उनके, बुजुर्ग बताते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी ठाकुरद्वारा मंदिर की रामलीला देखने आए थे। उनकी चरणपादुकाएं आज भी स्थापित हैं। उनकी मंशा है कि रामलीला का मंचन पुन: शुरू हो।
कलाकार विमल राय कहते हैं कि मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम के आशीर्वाद से ठाकुरद्वारा मंदिर का पूरी तरह कायाकल्प हो चुका है। मंदिर में देवी देवताओं की मूर्ति आज भी विराजमान है। बाजार कलां में दो दशक तक भगवान राम, सीता की भूमिका कर चुके अजय वर्मा कहना है कि नई पीढ़ी अब पॉप डांस देखने में खासी दिलचस्पी रखती हैं। उन्हें रामलीला का रोल सीखने में कोई रूचि नहीं है। पहले कलाकारों में शोक था।
ठाकुरद्वारा मंदिर की लीला के पूर्व कलाकार विमल राय बताते हैं कि दूरदराज के ग्रामीण कस्बे में आकर रामलीलाओं का मंचन देखने को खासे उत्सुक रहते थे। ब्लॉक के कुछेक गांवों में रामलीलाओं का मंचन सिमट कर रह गया हैं। उसमें भी दर्शकों का टोटा रहता हैं।
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