बिजनौर। गेहूं, सरसों की फसल कटाई के बाद जो खेत खाली रहते हैं। ऐसे समय में किसान अपने खेत में हरी खाद फसलों की बुवाई करें। इससे खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होगी। साथ ही अगली फसल में कम लागत के साथ उच्च उत्पादकता की प्राप्ति होगी।
यह जानकारी नगीना कृषि विज्ञान एवं शोध केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने दी। उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसा देखने में पाया गया है कि हरी खाद के रूप में किसान ढैंंचा या सनई की फसल का ही प्रयोग करते हैं। कहा कि नवरत्न हरी खाद का खेत में बुवाई कर उसकी समय पर जुताई करने से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने बताया कि इससे जमीन के अंदर लाभदायक जीवाणुओं की वृद्धि होगी। प्राकृतिक या जैविक खेती करने वाले किसानों को सुझाव दिया कि इस नवरत्न हरी खाद की फसल का प्रयोग अपनी खेती में अवश्य करें।
-इस मात्रा में करें बुवाई
वैज्ञानिकों द्वारा एक अनूठा पहल की गई है, जिसमें किसान अपने खेत में हरी खाद के रूप में प्रति एकड़ की दर से सनई- 1.5 किग्रा, ढैचा-1.5 किग्रा, उर्द-1.5 किग्रा, मूंग-1.5 किग्रा, लोबिया-1.5 किग्रा, ग्वार-1.5 किग्रा, ज्वार-1.5 किग्रा, बाजरा-1.5 किग्रा एवं तिल-0.5 किग्रा की समानुपातिक मात्रा में बुवाई करें। इन फसलों की जब एक उचित अवस्था खेत पर हो जाए, तो उनकी जुताई करके हरी खाद के रूप में प्रयोग करें।
-घट रही जीवांश कार्बन की मात्रा
उप कृषि निदेशक गिरीश चंद्र ने बताया कि जनपद की मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा घटकर 0.3 प्रतिशत रह गई है। जीवांश कार्बन मृदा संरचना को सही रखता है। जमीन के घटते जीवांश कार्बन को बढ़ाने के लिए खेतों में गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट, जैविक खाद और हरी खाद का प्रयोग करें। इनसे मिट्टी में कार्बनिक कार्बन की मात्रा बढ़ती है। जिले में मृदा परीक्षण का अभियान भी चल रहा है।