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राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस

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बढ़ रहे कैंसर के मरीज, सरकारी अस्पतालों में रेडियोथैरेपी तक नहीं
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मेरठ। जिले में कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में इनके लिए इलाज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में तो इलाज है ही नहीं, जबकि मेडिकल कॉलेज में नए मरीजों के लिए रेडियोथैरेपी बंद है। सात साल बाद जैसे-तैसे रेडियोथैरेपी शुरू हो पाई थी, लेकिन विकिरण अधिकारी न होने के कारण फिर से बंद हो गई। यहां कीमोथैरेपी होती है, रेडियोथैरेपी वाले 100 से ज्यादा मरीजों को हर माह हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में कैंसर के मरीजों को सरकारी अस्पतालों में सस्ता इलाज नहीं मिल पा रहा है। लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल सात नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है।
वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. उमंग मित्तल बताते हैं कि करीब 10 साल पहले उनके पास अगर कैंसर के 30 प्रतिशत मरीज आते थे तो अब 80 से 90 प्रतिशत आते हैं, यानी संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। हालांकि इसकी एक वजह यह भी है कि अब लोगों में पहले के मुकाबले कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ी है। मेरठ में हर माह करीब 80 से 100 नए कैंसर के मरीज आते हैं। इनमें 40 से 50 तंबाकू उत्पाद के कारण कैंसर से पीड़ित होते हैं, जबकि 75 प्रतिशत लोगों को 14-15 साल की उम्र यह लत लग जाती है।
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उन्होंने बताया कि पुरुषों में मुख कैंसर, फेफड़ों के कैंसर और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर ज्यादा हो रहे हैं। केएमसी कैंसर संस्थान के चेयरमैन और सर्जन डॉ. सुनील गुप्ता का कहना है कि वंशानुगत और कुछ पर्यावरणीय कारकों को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, लेकिन स्वस्थ आहार और बेहतर इलाज से कम कर सकते हैं। बेहतर होगा कि स्वस्थ आहार खाएं, धूम्रपान बंद करें, नियमित व्यायाम करें, वजन नियंत्रित रखें और शराब का सेवन नहीं करें।
लाइफ स्टाइल और खाद्य पदार्थों में मिलावट भी है ज़िम्मेदार
सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन का कहना है कि धूम्रपान और गुटखा आदि के अलावा कैंसर होने की वजह खाद्य पदार्थों में बढ़ती मिलावट भी है। बदलते लाइफ स्टाइल से भी यह बीमारी बढ़ रही है। लाइफ स्टाइल बदलकर और मिलावट से बचकर भी इस पर कुछ हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
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हौसला-परिवार है संग, जीत जाएंगे कैंसर से जंग
हौसला, उपचार और परिवार का साथ हो तो कैंसर जैसी बीमारी को भी हराया जा सकता है। बेगमपुल की प्रमिला दीक्षित, सूरजकुंड की टीना चड्ढा, श्रद्धापुरी की रहने वाली नीता शर्मा आदि ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने कैंसर को मात दी है। इन्हें स्तन कैंसर था। इनका कहना है कि शुरू में घबराहट हुई थी, लेकिन परिवार का सहयोग रहा। बेहतर उपचार मिला और हौसला बनाए रखा, जिससे कैंसर को भी हरा दिया।
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