मेरठ कॉलेज और एनएएस कॉलेज में सोमवार को जब सीनियर महिला शिक्षकों को प्रिंसिपल का चार्ज दिया गया तो इतिहास बन गया। ऐसा पहली बार हुआ है कि इन दो कोएड कॉलेजों में कोई महिला पहली बार प्रिंसिपल बनी है। इनके लिए गर्व के साथ चुनौती भी कम नहीं हैं। शिक्षकों के मनमुटाव और कैंपस का माहौल सुधारने के लिए मशक्कत करनी होगी। आए दिनों छात्रों को होने वाले झगड़ों से सख्ती से निपटना होगा।
मेरठ कॉलेज की स्थापना 1892 में हुई थी। अब तक कॉलेज 25 प्रिंसिपल देख चुका है। पहले पांच प्रिंसिपल अंग्रेज थे। नौ प्रिंसिपल कार्यवाहक रहे। डॉ. बेबी मित्तल बतौर प्रिंसिपल लेडी फर्स्ट हैं। सोमवार को जब उन्होंने चार्ज लिया तो शिक्षक और स्टॉफ ने इस बात पर खुशी जताई। अहम बात यह है कि डॉ. बेबी की एजूकेशन भी मेरठ कॉलेज से हुई है। यहां स्टूडेंट से लेकर प्रिंसिपल के पद तक वह पहुंची हैं।
डॉ. बेबी का कहना है यह उनके लिए गर्व की बात है। बीकॉम, एमकॉम और पीएचडी मेरठ कॉलेज से की। फिलहाल वह सीसीएसयू में डीन और कंवीनर भी हैं। एनएएस डिग्री कॉलेज 1952 से लेकर अब तक 11 प्रिंसिपल देख चुका है। डॉ. सुमनलता गर्ग 12वीं प्रिंसिपल होंगी। वह भी एनएएस कॉलेज की पहली महिला प्रिंसिपल हैं। इस खासियत और जिम्मेदारी का एहसास उन्हें है। डॉ. सुमनलता का कहना है कोशिश अच्छा करने की है।