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Meerut News: पारस के खिलाफ 80 सितंबर 2024 को भी शिकायत कर चुका था नरसी

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कपसाड़ घटना की जांच के दौरान एक अहम तथ्य सामने आया है जो बताता है कि पीड़ित पक्ष और आरोपी के बीच विवाद पुराना है। पुलिस का कहना है कि मृतका सुनीता के बेटे नरसी ने करीब सवा साल पहले 10 सितंबर 2024 को भी आरोपी पारस के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि उस शिकायत के बाद गांव के गणमान्य व्यक्तियों ने दोनों पक्षों को बैठाकर आपस में फैसला करा दिया।
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उस समय नरसी ने सलावा चौकी इंचार्ज को प्रार्थना पत्र देकर पारस के खिलाफ शिकायत की थी। हालांकि गांव की शांति व्यवस्था को देखते हुए गांव के गणमान्य लोगों और प्रधान की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता कराया गया। इस समझौते के अनुसार दोनों पक्षों ने विवाद बढ़ाने से बचने और शांति बनाए रखने का आश्वासन दिया था। दोनों पक्षों ने लिखित में कहा था कि अब हम दोनों पक्षों में कोई विवाद शेष नहीं है अतः कानूनी कार्रवाई न की जाए। समझौता पत्र पर नरसी कुमार, पारस सोम और उसके पिता योगेश के हस्ताक्षर हैं।


छावनी में तब्दील गांव, डीएम-एसएसपी भी पहुंचे

घटना के सातवें दिन (बुधवार) भी कपसाड़ का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील है। मेरठ के अलावा अन्य जिलों की पुलिस फोर्स, आरएएफ और पीएसी ने गांव के चप्पे-चप्पे और रास्तों को अपने कब्जे में ले रखा है। बुधवार को डीएम डॉ. वीके सिंह, एसएसपी डॉ. विपिन ताडा, एसडीएम उदित नारायण सेंगर और सीओ आशुतोष कुमार खुद मौके पर डटे रहे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
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तनाव के चलते ग्रामीणों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। गांव के मुख्य मार्गों और मृतका की बेटी रूबी के मकान वाली गली में विशेष निगरानी है। बाहरी लोगों की एंट्री पूरी तरह बैन है। फेरी वालों (सब्जी, दूध विक्रेता) को गांव में घुसने नहीं दिया जा रहा जिससे दैनिक जरूरतों का टोटा पड़ गया है। सबसे बुरा हाल बुजुर्गों और बीमारों का है, जिन्हें समय पर आवश्यक दवाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं। एसपी देहात अभिजीत कुमार ने स्पष्ट किया है कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं होती, पुलिस बल तैनात रहेगा और जरूरत पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है।
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