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पापों से मुक्ति दिलाती है ‘नरक चतुर्दशी’

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मेरठ।
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दिवाली से एक दिन पूर्व चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। पंचमहोत्सव के दूसरे दिन को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने से सौंदर्य वृद्धि होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चतुर्दशी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स के अनुसार, आज के दिन भगवान कृष्ण, यमराज और बजरंगबली की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से मनुष्य नरक में मिलने वाली यातनाओं से बच जाता है। इसे मुक्ति दिलाने वाला पर्व माना गया है।
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मां लक्ष्मी को अर्पित करें 14 दीप
शाम के समय मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए 14 दीपक अर्पित करें। ज्योतिष वैज्ञानिक भारत ज्ञान भूषण के अनुसार, पूजन के बाद छत व मुख्य द्वार पर दीप रखने चाहिए। आज के दिन धनवृद्धि के लिए मां लक्ष्मी से कामना करनी चाहिए।
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नरकासुर का किया था वध
नरक चतुर्दशी पर भगवान ने नरकासुर का वध किया था। दैत्यराज बली के यहां इसी दिन दीपावली मनाई गई थी। चतुर्दशी के दिन घर, व्यापार में शुभता के योग बनते हैं। नरक यातनाओं से बचने के लिए शाम को द्वार के दोनों ओर चार बत्तियों के दीपक जलाने चाहिए।
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