नौ जिलों में बीपीएड की शुल्क प्रतिपूर्ति एवं छात्रवृत्ति में गड़बड़झाले की पटकथा तैयार कर ली गई है। दरअसल, बीपीएड में बिना काउंसिलिंग लगभग 500 छात्रों को पहले दाखिला दे दिया गया और अब उनका प्रतिपूर्ति शुल्क भी शासन से मांगा गया है। हैरत की बात यह है कि चौधरी चरण सिंह विवि एवं हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर रखा है कि ऐसे दाखिलों को अवैध माना जाएगा।
छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति में नित नया गड़बड़झाला सामने आ रहा है। केवल मेरठ जनपद के 34 कालेजों में हाल ही में छापामारी हुई थी, जिनमें से काफी में भारी अनियमितता सामने आई। सात कालेजों पर तो मुकदमा भी दर्ज कराया गया। कुल 15 कालेजों को ब्लैक लिस्ट करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया। यहां खेल यह था कि छात्र थे ही नहीं, और कालेज प्रबंधन ने केवल कागजों में फर्जी दाखिले करा दिए।
अब नौ जिलों में नया खेल
अब ऐसे दाखिलों में शुल्क प्रतिपूर्ति का बड़ा गड़बड़झाला करने की तैयारी की जा चुकी है, जो नियम विरुद्घ किए गए हैं। चौधरी चरण सिंह विवि परिक्षेत्र के नौ जिलों के 34 कालेज ऐसे हैं, जिनमें बीपीएड में दाखिले किए गए हैं। इनमें से अधिकतर कालेजों में दस से 15 दाखिले बिना काउंसिलिंग के किए गए हैं। मामला सत्र 2104-2015 का है। काउंसिलिंग के बाद गुपचुप तरीके से ये एडमिशन किए गए।
ऐसे दाखिले हैं अवैध
हाईकोर्ट के निर्देश पर सीसीएसयू प्रबंधन स्पष्ट कर चुका है बिना काउंसिलिंग किए दाखिले अवैध माने जाएंगे। ऐसे छात्रों को एग्जाम देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पिछले सत्र में भी इस बाबत विवि ने सख्त कदम उठाने की बात कही थी। साथ ही हिदायत दी थी कि भविष्य में इस तरह से एडमिशन न किए जाएं।
मांग लिया शुल्क प्रतिपूर्ति
इन कालेजों ने दाखिले तो किए ही, साथ ही इन छात्रों का प्रतिपूर्ति शुल्क मांग लिया है। कई जिलों में जिला समाज कल्याण अधिकारियाें ने भी इसे शुद्ध डाटा बताते हुए शासन को प्रेषित कर दिया है। ऐसे छात्रों की संख्या लगभग 500 है। इस सत्र में कुल फीस 51 हजार रुपये है। ऐसे में कई करोड़ रुपये का चूना लगाने की तैयारी है। कालेज प्रबंधन ऐसे छात्रों को कह रहे हैं कि यदि कुछ नहीं हुआ तो कोर्ट का सहारा लेकर एग्जाम दिला देंगे।
पहले भी हो चुकी शिकायत
एबीवीपी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राहुल विकल इस बाबत पहले भी शिकायत कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि इन कालेजों की जांच जरूरी है। पर केवल मेरठ जनपद में 34 कालेजों की ही जांच हो गई। यदि सभी नौ जिलों में बीपीएड की जांच हो जाए, तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
इन नौ जिलों में खेल
मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर और सहारनपुर।