डीएफओ अदिति शर्मा का कहना है कि पौधे तैयार कराकर नर्सरी में रखे गए हैं। गड्ढों की खुदाई हो चुकी है। जुलाई में इन्हें रोपा जाएगा। तीनों गांवों को भी इसका लाभ मिलेगा।
दवाइयों में हो सकेगा इस्तेमाल
इतनी बड़ी संख्या में रोपे गए औषधीय पौधों को विभिन्न बीमारियों के लिए बनाई जाने वाली दवाईयों में इस्तेमाल किया जाएगा। जिससे कई बीमारियों का इलाज होगा। इसी के साथ गंगा किनारे का पर्यावरण भी बदलेगा।
ये हैं औषधीय पौधे
जो औषधीय पौधे लगाए जाने हैं उनमें ब्राह्मी, कोलियस, ग्रेनियम, लेमनग्रास, घ्रतकुमारी, चिटरोनेला, मेनथोल मिंट, पिपली, रोजमेरी, सतावर, सर्पगंधा, स्टेविया, वाच, वेटीवर, अफ्रीकन मेरीगोल्ड, अश्वगंधा, ब्लैक हेनबेन, चमोली, करलमेघ, केवान्च, मिल्क थिस्टल, ओपियम पॉपी, पालमारोसा, स्वीट फिनाल, तुलसा, तुलसी, डामास्क रोज आदि शामिल हैं। मेरठ कॉलेज के बॉटनी विभाग के डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि ये पौधे एक जगह पर नहीं मिलते हैं। अलग-अलग राज्यों में पाए जाते हैं। ऐसे में इनका एक साथ उगाया जाना बहुत उपयोगी है। मेरठ के तीनों गांवों का भी इससे नाम होगा।
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