नगर निगम प्रशासन शहर की जनता पर हाउस टैक्स के नए नए शासनादेश थोपने की तैयारी में तो जुटा है, लेकिन पुराना बकाए की वसूली करने को तैयार नहीं है। अगर शहर के समस्त 80 वार्डों में हाउस टैक्स बकाए की बात करें तो कोई ऐसा वार्ड नहीं है, जिसमें 10 लाख से एक करोड़ रुपये से कम बकाया हो।
कुल मिलाकर नगर निगम का 61 करोड़ रुपया हाउस टैक्स के नाम पर जनता के पास ही पड़ा है। माना जा रहा है कि अगर नगर निगम प्रशासन समय रहते बकाया हाउस टैक्स वसूल कर लेता तो स्मार्ट सिटी की सूची में मेरठ अंतिम पायदान पर न खड़ा होता।
नगर निगम की आय का सबसे बड़ा स्रोत हाउस टैक्स ही है। जनता से एकत्र हुए राजस्व से शहर में विकास होता है। हालांकि सरकार सभी नगर निगमों को स्वयं की आमदनी पर आधारित होने का रास्ता साफ करने जा रही है। सरकार के संकेत आने के बाद भी नगर निगम प्रशासन जागने को तैयार नहीं है। महानगर के 50 हजार से अधिक भवन अभी तक टैक्स से अछूते हैं। वहीं होटल, नर्सिंग होम, यानी कामर्शियल भवनों पर उचित टैक्स नहीं लगा है। जिसको लेकर बोर्ड बैठकों में पार्षद टैक्स लगाने की मांग करते रहे हैं।
मेरठ पर है कम राजस्व वसूली का दाग
उप्र के शहरों में मेरठ नगर निगम पर कम वसूली का दाग पिछले महीने लग चुका है। वह भी लखनऊ में ऐसे प्लेट फार्म पर जहां केंद्र और उप्र सरकार के अधिकारी स्मार्ट सिटी के लिए शहरों का चयन कर रहे थे। इस दाग को धोने के लिए नगर निगम प्रशासन कतई गंभीर नहीं है। सभी राजनीतिक दल मेरठ के स्मार्ट सिटी मिशन में शामिल होने की कम उम्मीदों के लिए निगम प्रशासन को ही दोषी मानकर चल रहे हैं।
टैक्स लगे तो बढ़ेगी आय
महानगर में 50 हजार भवन अभी ऐसे माने जा रहे हैं, जिनपर नगर निगम प्रशासन ने टैक्स ही नहीं लगाया है। अगर पुरानी दरों से ही इन भवनों पर टैक्स लगा दिया जाता है तो आय में लाखों रुपये की बढ़ोत्तरी होगी। निगम को नई टैक्स दरें यानी 2014 के शासनादेश को लागू करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। पिछले सप्ताह महापौर ने भी पहले 50 हजार नए छूटे भवनों पर टैक्स लगाने के निर्देश दिए हैं।
कर्मचारियों की कमी बताकर छुड़ाते हैं पीछा
नगर निगम हाउस टैक्स विभाग के अधिकारियों को जब भी पार्षदों ने कार्यकारिणी और बोर्ड की बैठक में कम वसूली और भी छूटे भवनों पर टैक्स लगाने के लिए घेरा तो वह यही कहते नजर आए कि कर्मचारियों की कमी है। समय से जनता के पास हाउस टैक्स के बिल तक नहीं पहुंचते हैं। अधिकारियों के इस बयान के बाद पार्षद भी चुप्पी साध लेता है।
वर्जनः
हाउस टैक्स बकाया वसूलने और छूटे सभी भवनों पर टैक्स लगाने की नोटिस कार्रवाई चल रही है। अन्य वर्षों के मुकाबले हाउस टैक्स का राजस्व बढ़ा है। पिछले चार माह में लगभग 20 हजार नए भवनों पर टैक्स लगाया गया है। नए शासनादेश का अनुपालन कराना हमारा दायित्व है।
दिनेश यादव, कर निर्धारण अधिकारी
नगर निगम के अधिकारी जनता पर बार-बार नई टैक्स दरें थापने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। पहले निगम के अधिकारियों को बकाए 61 हजार की वसूली करनी होगी। साथ ही 50 हजार नए भवनों पर टैक्स लगाना होगा।
हरिकांत अहलुवालिया, महापौर