तीन साल से 70 फीसदी रिजल्ट और नैक से ग्रेड प्राप्त कॉलेजों को ही एलएलएम पाठयक्रम की मान्यता दी जाएगी। चौधरी चरणसिंह विवि प्रशासन ने एलएलएम पाठ्यक्रम के लिए नए नियम लागू किए हैं। जिन कॉलेजों में एलएलएम कोर्स चल रहा है, उनकेलिए भी मुश्किल खड़ी हो सकती है। नए नियमों के बारे में सभी कॉलेजों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, हालांकि विवि के इस फैसले से एलएलएम की गुणवत्ता में सुधार होगा।
सीसीएसयू द्वारा जारी नए नियमों के तहत एलएलएम पाठ्यक्रम के लिए आवेदन कर रहा संस्थान को नैक ग्रेड प्राप्त हो। अगर कॉलेज में तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स चल रहा है तो कम से कम पांच साल और अगर बीए-एलएलबी या बीकॉम-एलएलबी चल रहा है तो सात साल संबद्घता मिले हो जाने चाहिए। कॉलेज का तीन साल का रिजल्ट 70 फीसदी से ज्यादा रहा हो। कॉलेज में विवि द्वारा अनुमोदित प्राचार्य हो। बीसीआई केसारे नियम पूरे करता हों। प्राचार्य और फैकल्टी मेंबर वहीं पर तैनात हैं, इसके लिए 12 महीने का बैंक का स्टेटमेंट जरूरी किया गया है। राजकीय और एडेड कॉलेज को सेल्फ फाइनेंस कॉलेज के मुकाबले वरीयता दी जाएगी। एक कॉलेज को केवल 20 सीटों की ही संबद्घता मिलेगी। एलएलएल कोर्स की किताबों के लिए पांच लाख रुपये का बजट जरूरी रखा गया है। इसके अलावा पांच जर्नल, रेग्युलर लाइब्रेरी और ई-लाइब्रेरी की व्यवस्था होनी चाहिए। 20 छात्रों पर कॉलेज में एक शिक्षक अनिवार्य हो। इसके लिए यूजी कोर्स के लिए यूजीसी की तरफ से लिया जाने वाला टूएफ रजिस्ट्रेशन आवश्यक है। कॉलेजों में नए नियमों के लागू होने से एलएलएम की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
अभी तक एलएलएम की हैं 480 सीटें
सीसीएसयू कैंपस और संबद्घ कॉलेजों में एलएलएम की 480 सीटें हैं। एडेड कॉलेजों की बात करें तो मेरठ कॉलेज में एलएलएम की 120 सीटें हैं। एनएएस कॉलेज में 60 और डीएवी कॉलेज मुजफ्फरनगर में 60 सीटें हैं। सीसीएसयू कैंपस के विधि अध्ययन संस्थान में 120 सीटें हैं। सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों की बात करें तो दीवान इंस्टीट्यूट मेरठ में 20, कॉशमस कॉलेज गाजियाबाद में 60 और अंगूरी देवी कॉलेज बुलंदशहर में 40 सीटें हैं। पिछले कुछ समय में कई कॉलेजों की तरफ से एलएलएम की मान्यता को लेकर आवेदन किया था। इन कॉलेजों में वह सुविधाएं नहीं हैं जो एलएलएम कोर्स के लिए होनी चाहिए। ऐसे में कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने एक कमेटी गठित कर नए नियम बनाने के निर्देश दिए थे। शनिवार को विवि ने इसको जारी कर दिया है। जो भी कॉलेज अब एलएलएल पाठ्यक्रम शुरू कराना चाहते हैं उनको यह सारे नियम पूरे कराने होंगे।