फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
मुनेश देवी सवाल करती हैं कि क्या यही है शहीदों की पत्नियों का सम्मान। सरकार ने पेट्रोल पंप दिलाया। लेकिन इसमें भी खेल कर दिया। जमीन तक हमारी नहीं है। कंपनी कब ले ले कुछ नहीं कहा जा सकता है। मुनेश देवी बताती हैं कि जब तक वह जिंदा हैं, पेट्रोल पंप चल रहा है। उनके बाद कंपनी कभी भी डीलरशिप खत्म कर सकती है। शहीदों के परिवारों के लिए ये कैसी मदद है। दो साल पहले तक हमें पेंशन की पूरी रकम भी नहीं मिलती थी।