वैदिक धर्म के रक्षक थे
स्वामी भीष्म: गुरुदत्त
- पुण्यतिथि पर हुआ यज्ञ, अर्पित की श्रद्धांजलि
संवाद न्यूज एजेन्सी
मुजफ्फरनगर। स्वतंत्रता सेनानी, महान भजनोपदेशक स्वामी भीष्म की 39 वीं पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति यज्ञ में भावपूर्ण स्मरण किया गया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि स्वामी भीष्म की ने देश में राष्ट्रभक्ति की अलख जगाई थी।
संतोष विहार में वैदिक संस्कार चेतना केंद्र पर वेद मंत्रोच्चार से यज्ञ हुआ। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि स्वामी भीष्म ऋषि दयानन्द के सच्चे अनुयायी थे। पाखंड, अंधविश्वास, कुरीतियों के विरुद्ध उत्तर भारत में वेदों का प्रचार-प्रसार किया। क्रांतिकारी भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाक उल्ला खां उनके करहेड़ा आश्रम गाजियाबाद में रहे। लाल बहादुर शास्त्री, चौधरी चरण सिंह, रामचंद्र विकल जैसे राजनीतिज्ञ ने उनका मार्गदर्शन लिया। उन्होंने 200 से ज्यादा भजनों की पुस्तकें लिखी और 65 भजन मंडली तैयार की। स्वामी जी सच्चे देशभक्त आर्य सन्यासी थे। उनके जीवन चरित्र से युवा शिक्षा लें। अथर्व भारद्वाज, लक्ष्यदेव, देवांश, मास्टर राजेन्द्र कुमार ने श्रद्धांजलि दी। उधर, आर्य समाज गांधी कालोनी में यज्ञ वेदी पर स्वामी भीष्म की पुण्यतिथि पर यज्ञ किया गया। यज्ञ ब्रह्म इंद्रपाल सिंह आर्य ने कहा कि समाज सुधार के लिए उनके कार्य अतुलनीय है। जय पाल धीमान ने उनकी राष्ट्रभक्ति के प्रसंग सुनाये। देवेंद्र राणा, मनीष आर्य, विजय पाल सिंह, प्रमोद कुमार, संगीता राठी, ओमवती, कांता आदि मौजूद रही।
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