वर्ष 2013 के दंगा पीड़ितों को बसाने के लिए देवबंद के एक ट्रस्ट को दान दी गई जमीन पर बैंक का लोन था। लोन ना चुकाने पर बैंक ने जमीन के मालिक को करीब 16 लाख की आरसी जारी कर दी, जिस पर तहसील प्रशासन ने मालिक और ट्रस्ट दोनों को नोटिस जारी कर दिए हैं। वर्तमान में इस जमीन पर अलफलाह कॉलोनी बसी है। जिसमें 305 दंगा पीड़ित परिवार रह रहे हैं। तहसील प्रशासन के अनुसार यदि रकम वसूली नहीं होती तो जमीन की नीलामी कर वसूली हो सकती है। ऐसे में यहां रहने वाले दंगा पीड़ित परिवारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ये मामला सुर्खियों में है।
वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर और शामली में हुए दंगों के बाद कई मुस्लिम परिवार गांव छोड़कर चले गए थे। ये लोग इधर उधर डेरा डालकर रहने लगे थे। देवबंद स्थित तैय्यब ट्रस्ट दंगा पीड़ितों की मदद को आगे आया था। वर्ष 2014 में खुरगान निवासी हाजी दिलशाद ने दंगा पीड़ितों को बसाने के लिए 21 बीघा जमीन तैय्यब ट्रस्ट को दान में दी। इस पर ट्रस्ट ने मकान बनाकर वहां 305 दंगा पीड़ित परिवारों को बसाया। इस कॉलोनी का नाम अलफलाह कॉलोनी रखा। ये परिवार तभी से यहां बसे थे। अब इस प्रकरण में नया मोड़ आया गया है। नायब तहसीलदार कोमिंद्र गुप्ता के अनुसार ट्रस्ट को दान दी गई जमीन पर जमीन के मालिक ने लोन लिया हुआ है। बैंक ने 16 लाख रुपये बकाया बताकर तहसील प्रशासन को आरसी जारी की गई। इस आरसी पर जमीन के मालिक हाजी दिलशाद और ट्रस्ट दोनों को नोटिस भेजकर अवगत करा दिया गया है। उनसे बैंक के लोन की रकम अदा कराने को कहा गया है।