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मुजफ्फरनगर दंगे के 131 मुकदमे वापस लेने से डीएम का इंकार, संगीत सोम सहित कई नाम हैं शामिल

Mon, 13 Aug 2018 12:55 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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विधायक संगीत सोम
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वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर और शामली में हुए दंगे के 131 मुकदमे वापस लेने की राज्य सरकार की प्रक्रिया को झटका लगा है। इस संबंध में शासन को भेजी रिपोर्ट में डीएम ने प्रशासनिक स्तर पर वाद वापसी से इंकार कर दिया है और गेंद शासन के पाले में डाल दी है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि कोर्ट में विचाराधीन सभी मुकदमों की वापसी संभव नहीं है। शासन अपने स्तर से जो भी निर्णय लेगा, वह सर्वमान्य होगा। 

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इन मुकदमों में सांसद सजीव बालियान, विधायक संगीत सोम, विधायक उमेश मलिक आदि से जुड़े मुकदमे शामिल नहीं हैं। पांच फरवरी 2018 को खाप चौधरियों और भाजपा नेताओं ने सीएम योगी आदित्यनाथ से भेंट की थी। प्रतिनिधिमंडल ने सीएम को 131 मुकदमों की सूची सौंपी थी, जिनमें कहा गया था ये मुकदमे रंजिशन और पुलिस द्वारा दर्ज कराए गए हैं।

राज्य सरकार ने मार्च 2018 में डीएम से मुकदमों की वापसी को लेकर 13 बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी। सरकार के फैसले पर विपक्षी पार्टियों ने हो-हल्ला भी मचाया था। कैराना उप चुनाव में भी यह मुद्दा गर्र्माया था। डीएम राजीव शर्मा ने आठ अगस्त को शासन को यह आख्या गुपचुप तरीके से भेज दी है। जानसठ के कवाल कांड के बाद सात सितंबर 2013 को मुजफ्फरनगर और शामली में दंगा भड़का था, जिसमें 65 से ज्यादा बेगुनाहों की मौत हो गई थी। हिंसा से गांव छोड़ आए 50 हजार लोगों ने  शरणार्थी कैंपों में शरण ली थी।

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मुजफ्फरनगर दंगों के जिन मुकदमों की 13 बिंदुओं पर शासन ने रिपोर्ट मांगी थी, वह प्रेषित कर दी गई है। एसएसपी,संयुक्त निदेशक अभियोजन और जिला शासकीय अधिवक्ता की आख्या ली गई थी। वादों को प्रशासनिक स्तर पर वापसी लिया जाना संभव नहीं है। राजीव शर्मा, डीएम मुजफ्फरनगर।

सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगे में दर्ज हुए फर्जी मुकदमे वापस लेने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में डीएम उन्हें वापस लेने से नहीं रोक सकते हैं। इसमें सरकार का आदेश है। उस समय सपा की सरकार थी और भाजपाइयों सहित अन्य लोगों पर बड़ी संख्या में फर्जी मुकदमे दर्ज हुए थे, जिन्हें वापस कराया जायेगा। ठा. संगीत सोम, विधायक

सांसद डॉ संजीव बालियान
ने कहा कि दंगे के 131 मुकदमों में डीएम ने जो रिपोर्ट भेजी है, उससे प्रक्रिया पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अंतिम निर्णय सीएम को लेना है। न्याय विभाग की कमेटी डीएम की आख्या पर बिंदुवार विचार विमर्श के बाद रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजेगी। सांसद डॉ. बालियान ने कहा कि दंगे के जिन मुकदमों की वापसी के लिए सीएम से आग्रह किया गया था, वे सभी मुकदमे आगजनी, आपसी रंजिश और पुलिस की ओर से दर्ज कराए गए थे। इन वादों में निर्दोष लोगों को आरोपी बनाया गया है। बेगुनाहों को फर्जी मुकदमों से बचाने के लिए पुन: सीएम से मुलाकात कर अपनी बात रखी जाएगी। 

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