यूपी के मुजफ्फरनगर जिले में छह साल पहले हुए दंगे के दौरान लिसाढ़ गांव के एक मुकदमे में एडीजे-12 कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में 12 आरोपियों को बरी कर दिया।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में कवाल कांड के बाद सात सितंबर को नंगला मंदौड़ की महापंचायत से लौटते लोगों पर हमले के बाद जिले में दंगा भड़का था। दंगे का एक मुकदमा लिसाढ़ निवासी सुलेमान ने 16 सितंबर 2013 को फुगाना थाने में आगजनी और डकैती का दर्ज कराया था। उसने गांव के ही नरेंद्र उर्फ लाला, धर्मेंद्र उर्फ काला, बिजेंद्र, राजेंद्र, अनुज, अमित, ब्रह्म, सुरेंद्र, कृष्णा, निशु, शोकेंद्र, बिट्टू उर्फ अरुण के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोप था कि सात सितंबर की शाम को आरोपी हथियारों से लैस होकर उनके घर पर आए। धावा बोलकर परिजनों से मारपीट कर करीब डेढ़ लाख की नगदी, जेवरात और अन्य सामान लूट लिया तथा मकान में आग लगा दी। परिवार जान बचाकर भागे। एसआईटी ने उक्त आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे-12 संजीव कुमार तिवारी की कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से मौके के तीन गवाह पेश किए गए। बयान के दौरान गवाह पक्ष द्रोही हो गए।
साक्ष्य के अभाव में उक्त सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। इसके अलावा इस मुकदमे में गठवाला खाप के मुखिया बाबा हरिकिशन को भी नामजद किया गया था। एसआईटी ने जांच के दौरान बाबा हरिकिशन का नाम निकाल दिया था और उक्त 12 समेत 13 के खिलाफ चार्जशीट दी थी। 13वें आरोपी ऋषिदेव की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी।
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