वहीं कृषक आयोग के सदस्य धर्मेंद्र मलिक कहते हैं कि चंद्रपाल फौजी भाकियू के कर्मठ सिपाही थे। चौधरी टिकैत के साथ किसान आंदोलनों के दौरान कई बार जेल गए थे। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन अध्यक्ष अशोक बालियान ने कहा कि चौधरी टिकैत के मुंह से निकला शब्द फौजी के लिए आदेश होता था। सैनिक की तरह अपनी बात पर अड़ जाते थे। तंग आए, जंग आए उनका जुमला काफी प्रसिद्ध हुआ।
महेंद्र सिंह टिकैत के सारथी बन गिरफ्तारी से बचाया था
वर्ष 2007 में मुख्यमंत्री मायावती पर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत द्वारा टिप्पणी करने से उन पर मुकदमा दर्ज किया गया था। बिजनौर से ही पुलिस ने चौधरी टिकैत की घेराबंदी शुरू कर दी थी। उस समय उनकी गाड़ी चंद्रपाल फौजी चला रहे थे। उन्होंने चौधरी टिकैत को जानसठ और मंसूरपुर के जंगलों से निकाल कर सुरक्षित सिसौली पहुंचाया था।
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