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गुटबाजी और मुस्लिम ध्रुवीकरण ने तोड़ा सपना

Sun, 12 Mar 2017 02:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 शहर विधानसभा सीट कभी किसी एक की होकर नहीं रही। यहां पर जब-जब मुस्लिम बंटा, तब-तब भाजपा को जीत मिली। लेकिन मुस्लिम एकजुट होने पर हार का सामना करना पड़ा। इस बार जितने बड़े अंतर से वाजपेयी हारे हैं, उसके पीछे उनके खिलाफ पार्टी के ही एक धड़े की लामबंदी भी अहम मानी जा रही है।
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 डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी शहर सीट पर लगातार आठवीं बार चुनाव लड़ रहे थे। अब तक वह चार बार इस सीट से विधायक रह चुके हैं। सिर्फ 1996 और 2002 का चुनाव ही वह लगातार जीते थे, जबकि 2007 में उन्हें हार मिली थी। इसके बाद 2012 में वह फिर से विधायक चुने गये। लेकिन इस चुनाव में आंकड़ा पूरी तरह उनके मुफीद रहा था। इस चुनाव में सपा के साथ ही कांग्रेस और बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे। जिनके बीच मुस्लिम मतों के बंटवारे में उन्हें करीब 7500 वोटों से जीत हासिल हुई थी।
2012 के चुनाव में वाजपेयी को 68154 वोट मिले, तो इस बार उन्हें 74448 वोट मिले, जो तब से लगभग छह हजार ज्यादा हैं। लेकिन इस बार जहां मतदान ज्यादा हुआ तो कुल वोट भी पहले से ज्यादा थे। ऐसे में वाजपेयी के वोट बैंक में इस बार कोई इजाफा नहीं हुआ। वहीं, बात अगर सपा प्रत्याशी की करें तो मुस्लिम मतों के बंटवारे में उन्हें 61876 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के यूसुफ कुरैशी को 31895 वोट मिले थे। यदि इनका जोड़ देखें तों करीब 93 हजार बैठता है। जबकि बसपा के सलीम को 13164 वोट मिले थे। लेकिन इस बार भी बसपा प्रत्याशी को 12636 वोट मिले, जो पिछले चुनाव के आसपास ही बैठते हैं। जबकि इस बार सपा प्रत्याशी को 103217 वोट मिले हैं। इन तमाम आंकड़ों से स्पष्ट है कि इस बार मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण पूरी तरह सपा के पक्ष में हुआ। दलित वोट बसपा के पक्ष में गये। ऐसे में शहर सीट जिस पर मुस्लिम मतदाता पहले से ही करीब 12 हजार ज्यादा हैं, तो माहौल वाजपेयी के विपरीत था।
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गुटबाजी ने बढ़ा दिया अंतर
जातिगत आंकड़ों से अलग एक बड़ा फर्क भाजपा की गुटबाजी का भी रहा। वाजपेयी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर रहते हुए उनके खिलाफ गुटबाजी बढ़ गयी थी। महानगर में सांसद और कैंट विधायक खेमा पूरी तरह उनके विरोध में खड़ा हो गया था। जो उनके चुनाव तक प्रभावी रहा। इस गुट ने खुलकर तो विरोध नहीं किया। लेकिन मतदान को लेकर बरती गयी उदासीनता ने रही-सही कसर पूरी कर दी।
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