जांच में उलझता रहा हत्याकांड
पूर्व सांसद की हत्या में पुलिस की जांच जितनी आगे बढ़ी, उतनी ही उलझती रही। पुलिस ने आरोपी संदीप को जेल भेजा था। जबकि पुलिस की जांच में तथ्य सामने आया कि हत्या के वक्त आरोपी संदीप मेरठ जेल में ही चोरी के मामले में बंद था। पुलिस के मुताबिक संदीप ने बताया कि आरोपी कुलदीप ने कहा था कि जेल से बाहर निकलकर पूर्व सांसद के भाई यशपाल सिंह को फोन करके धमकी दे देना। पुलिस उसे पकड़ेगी तो जुर्म कुबूल कर लेना। हत्या के दौरान वह जेल में था तो जांच में वह बेकसूर साबित हो जाएगा।
पूर्व सांसद ठा. अमरपाल सिंह की हत्या को आठ साल होने वाले हैं। पीड़ित परिवार को आज भी इंसाफ का इंतजार है। पूर्व सांसद के परिवार का कहना कि पुलिस ने इस मामले में लापरवाही की। खुद की लापरवाही को छुपाने के लिए केस को उलझा दिया। अधूरा खुलासा किया। यह मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है।
कैसे और क्यों हुई हत्या
ठाकुर अमरपाल सिंह की हत्या कैसे और क्यों हुई। यह सवाल पीड़ित परिवार व मेरठ की जनता में जेहन में आज भी उठते है। जिन आरोपियों को पुलिस ने अपनी जांच में मुल्जिम बनाया, उनसे अमर पाल सिंह की लाइसेंसी रिवाल्वर बरामद नहीं की। वारदात में प्रयुक्त सेंट्रो का भी पुलिस सुराग नहीं लगा सकी। इस मामले में कई तेजतर्रार आईपीएस को भी लगाया था, बावजूद खुलासा अधूरा बताया गया।
बताया रोडरेज,खोला लूट पर
पूर्व सांसद की हत्या के पीछे पुलिस ने रोडरेज बताया था। लेकिन बाद में मवाना पुलिस ने हत्या के पीछे लूट करना बताया। जिसके चलते पुलिस ने आरोपी संदीप और कुलदीप के खिलाफ धारा 396, 308, 506, 203 आइपीसी और 120बी की धारा लगाई गई। 25 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पूर्व सांसद की हत्या के मामले में अलग-अलग चर्चाएं चलती रही। खुलासे में भी कई झोल बताए। सीनियर अधिवक्ता अमित दीक्षित ने बताया कि आरोपियों से पूर्व सांसद की लाइसेंसी रिवाल्वर और हत्या में प्रयुक्त आरोपियों की सेंट्रो बरामद नहीं हुई। उसके चलते केस की बुनियाद कमजोर हो रही है।