इससे जाहिर है कि वारदात के बाद जेल प्रशासन किस तरह हड़बड़ाया हुआ था। जेल से थाने की दूरी करीब छह किलोमीटर है। पुलिस को सूचना देरी से देने को लेकर जेल प्रशासन भी जांच के दौरान निशाने पर आ सकता है।
मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं बंदी
सुनील राठी के फतेहगढ़ जेल में शिफ्ट हो जाने के बाद भी बागपत जेल में बंदी मुंह खोलने को तैयार नहीं है। अभी तक पुलिस एक सौ से ज्यादा बंदियों के बयान ले चुकी है। अधिकतर में सिर्फ यही जानकारी मिली है कि वह सो रहे थे और गोली चलने की आवाजें आई। कुछ बंदियों ने कहा कि वह नहाने की तैयारी कर रहे थे, कुछ का कहना है कि वह शौचालय में थे। वारदात कैसे हुई, इस गुत्थी में भी उलझी है।
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