मेरठ। नगर निगम द्वारा जारी जलापूर्ति पर सवाल खड़े हो गए हैं। सच संस्था ने शहर के पांच स्थानों से पानी के नमूने लेकर जांच कराई तो उनमें पानी में हार्डनेस ज्यादा मिली। वहीं, बीमारियां फैलने की आशंका भी जताई है। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजी जा रही है। यह जानकारी संस्था के अध्यक्ष संदीप पहल ने बुधवार को पत्रकारों को दी।
उन्होंने कहा कि नगर निगम महानगर में ट्यूबवेल, सबमर्सिबल, हैंडपंप तथा भोले की झाल से जलापूर्ति करता है। महानगर के भूजल की गुणवत्ता बहुत खराब है। उन्हाेंने जानकारी दी पिछले महीने नगर आयुक्त डॉ. अरविंद चौरसिया को पत्र लिखकर एक कर्मचारी को उनकी टीम के साथ शहर के विभिन्न स्थानों से पानी के नमूने लेने के दौरान उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। इसके बावजूद संस्था को सहयोग नहीं मिला। संस्था ने ही अपने खर्च से मलियाना स्थित मोहन राम बाबा मंदिर, गांवड़ी, नौचंदी गेट स्थित गणेश मंदिर और पंचवटी कॉलोनी में दो स्थानों से पानी के नमूने लेकर गाजियाबाद की इकोप्रो इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से जांच कराई। संदीप पहल का कहना है कि जांच रिपोर्ट में पानी में सेलिनियम पाया गया है। वहीं, हेवी मेटल आ रहे हैं। ये मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस पेयजल से लीवर खराब होना, उल्टी आना, हाथ-पैर में दर्द हो सकता हैं। इसलिए यदि नगर निगम प्रशासन ने जनता को बगैर क्लोरीनेशन और पानी की जांच कराए बिना आपूर्ति किया तो लड़ाई न्यायालय तक लड़ी जाएगी।