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मुख्य चौराहों पर ट्रैफिक बेशुमार, मेट्रो चले तो कम हो भार

Mon, 04 Feb 2019 01:49 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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meerut - फोटो : meerut
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महानगर के मुख्य चौराहे क्षमता से पांच गुना ज्यादा ट्रैफिक की मार झेल रहे हैं। यदि मेट्रो ट्रेन चले तो चौराहों से यह लोड कम हो सकता है। यातायात प्रबंधन को लेकर एमडीए, ट्रैफिक पुलिस तथा नगर निगम के संयुक्त रूप से किए गए सिटी मोबिलिटी  सर्वे (सीएमएस) में यह स्थिति सामने आई है। एजेंसियों ने अपनी संयुक्त रिपोर्ट शासन को प्रेषित कर दी है ताकि मेट्रो की संभावनाएं यहां जल्दी ही विस्तार ले सकें।
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शहर में इस समय हालात खराब हैं। जाम के कारण पूरा शहर हांफ रहा है। मुख्य चौराहों की हालत यह कि शायद ही इनमें से कोई एक चौराहा ऐसा हो जिस पर रोजाना जाम न लगता हो। घंटों के जाम ने लोगों की हालत खराब कर दी है। विभाग भी परेशान हैं कि आखिर इस जाम से निपटने का क्या उपाय किया जाए। जल्दी ही इम्प्रूवमेंट प्लान बनाना अब अनिवार्य हो गया है। साथ ही मेरठ में मेट्रो का प्रोजेक्ट भी चल रहा है। इसकी संशोधित डीपीआर बनाई जा चुकी है। उप्र सरकार इसे हरी झंडी देकर केंद्र सरकार को भेज चुकी है। लेकिन अभी काम शुरू होने की स्थिति नजर नहीं आ रही है। मेरठ में जाम की समस्या को दूर करने के अलावा मेरठ में मेट्रो की आवश्यकता पर भी सर्वे किया जा रहा है। इरादा यह देखना ही है कि शहर के जाम को खत्म करने में क्या मेट्रो की भूमिका रहेगी।
पीक ऑवर में स्थिति ज्यादा खराब
एमडीए, नगर निगम एवं ट्रैफिक पुलिस ने ज्वाइंट काम्प्रीहेन्सिव मोबिलिटी प्लान पर काम शुरू किया है। इससे पूर्व इसके लिए सिटी मोबिलिटी सर्वे (सीएमएस) कराया गया। मुख्य चौराहों पर सर्वे में सामने आया है कि सभी चौराहों पर उनकी क्षमता से पांच गुना ज्यादा ट्रैफिक दौड़ रहा है। पीक ऑवर में तो यह स्थिति और खराब हो जाती है। ऐसे में न केवल ट्रैफिक प्लान बनाना होगा बल्कि मेट्रो ट्रेन चलाना भी यहां जरूरी है। मेट्रो ट्रेन चलेगी तो काफी यातायात चौराहे पर काम होगा।
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रैपिड भी कम करेगी लोड
मेरठ
से दिल्ली के बीच रैपिड ट्रेन का संचालन होगा तो इससे भी यहां के चौराहों का लोड कम होगा। दरअसल, मेरठ से दिल्ली के बीच रोज परतापुर तिराहे से ही एक लाख से डेढ़ लाख वाहन गुजरते हैं। यह संख्या केवल सुबह सात से रात नौ बजे तक की हैं। इनमें से सत्तर से अस्सी हजार वाहन एचआरएस चौक से होकर गुजरते हैं। यदि दिल्ली से मेरठ के बीच रैपिड ट्रेन चल जाए तो यह लोड भी काफी कम होगा। तीनों ही विभागों ने अपनी संयुक्त रिपोर्ट  शासन को प्रेषित कर दी है।
बस अड्डे बाहर हों
हमने सर्वे किया है कि मेरठ में चौराहे पांच गुना से ज्यादा लोड से जूझ रहे हैं। तीन विभागों ने सिटी मोबिलिटी सर्वे की रिपोर्ट भेजी है। यहां से बस अड्डे तो बाहर होने ही चाहिए, साथ ही मेट्रो और रैपिड ट्रेन जैसे प्रस्ताव भी जरूरी हैं। -संजीव वाजपेयी, एसपी ट्रैफिक


यह है सर्वे
चौराहा                 आदर्श स्थिति     वर्तमान स्थिति
बेगमपुल                1500            7500
ईव्ज चौक              1000            6500
हापुड़ अड्डा             1400          7000
एचआरएस चौक -    1300          7000
घंटाघर-               1600          5000
तेजगढ़ी-             1000           4000
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नोट: आंकड़े वाहन प्रति घंटा पीक ऑवर में लिए गए हैं व औसतन हैं।
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