हाल ही में मैक्सिको में आयोजित आइएसएसएफ (इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन) विश्वकप में मेरठ के शहजर रिजवी ने गोल्ड मैडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने दस मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में विश्व रिकार्ड भी कायम किया। मैक्सिको से लौटने के बाद शुक्रवार को शहजर मेरठ पहुंचे तो उन्होंने एनएच-58 स्थित एक रेस्टोरेंट में अमर उजाला के साथ खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपनी सफलता के कई राज खोले। उन्होंने बताया कि सफलता के मुकाम तक पहुंचने के लिए मैंने पिता से सिर्फ एक साल की मोहलत मांगी थी। और ऊपर वाले का शुक्र है कि मेरी मेहनत सफल हुई। इस प्रतियोगिता के अलावा भी शहजर पांच अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी पदक जीत चुके हैं।
सवाल- शूटिंग की ओर आपका रुझान कैसे बढ़ा?
जवाब - मैं अपने चचेरे भाई रय्यान रिजवी और साहुल रिजवी को शूटिंग करते देखता था। उस दौरान मैं छोटा था, इसलिए कोई मुझे गन नहीं देता था। मेरठ नौचंदी मेले और आसपास गांवों में लगने वाले मेलों में एयरगन से बैलून पर निशाना लगाकर दिल की भड़ास निकाल लेता था। इसके बाद निशानेबाजी करना मेरा शौक बन गया।
सवाल - इस सफलता का श्रेय किसको देंगे?
जवाब- मेरे पापा शमशाद अली रिजवी ने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया। हालांकि पढ़ाई को लेकर भी वो चिंतित रहते थे। लेकिन मेरे शौक को देखते हुए वर्ष 2012-13 में घर की छत पर शूटिंग रेंज बनाकर अभ्यास कराया। इसमें मेरा स्कोर हमेशा शानदार रहता था। पापा सहित मेरे पूरे परिवार ने ही मेरा साथ दिया। कामनवेल्थ में चयन न होने से पापा और मैं हताश थे। लेकिन इस प्रदर्शन ने सारे दर्द और मायूसी को खुशी में बदल दिया।
सवाल- शूटिंग को लेकर जीवन के क्या उतार-चढ़ाव रहे?
जवाब- शूटिंग में सुविधाओं के अभाव और महंगाई को देखते हुए हौसले दिन प्रतिदिन टूटते जा रहे थे। पापा ने साफ कह दिया कि मेरे साथ फैक्ट्री में काम करने चला कर। लेकिन मैंने उनसे एक साल की मोहलत मांगी, जो उन्होंने दे दी। इसके बाद रात-दिन मेरे मन में शूटिंग का ही ख्याल रहने लगा। शास्त्रीनगर स्थित पिन प्वाइंट पर भी मैंने कुछ दिन कोचिंग ली। 2013 से निशानेबाजी में राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धा से शुरूआत हुई।
सवाल- आपके जीवन का टर्निंग प्वाइंट क्या रहा?
जवाब -एयरफोर्स में ज्वाइनिंग के दौरान जर्मनी खेलने जाना था। ज्वाइनिंग के दिन ही फ्लाइट थी। ऐसे में एयरफोर्स अधिकारियों ने मेरा साहस बढ़ाया और मुझे खेलने जाने दिया। वहां से लौटकर मैंने एयरफोर्स में ज्वाइनिंग ली।
सवाल- आइएसएसएफ विश्वकप में विश्व रिकार्ड बनाकर कैसा महसूस कर रहे हैं?
जवाब- शूटिंग रेंज से प्रदर्शन के बाद जैसे ही मैं बाहर निकला तो मीडिया के लोगों ने मुझे बधाई देनी शुरू कर दी। मुझे बाहर निकलने के बाद ही पता चला कि मैंने विश्व रिकार्ड बना दिया है। इसके बाद भारत लौटने को लेकर दिल में उत्साह पैदा हो गया। वहां से निकलकर 22 घंटे एयरपोर्ट पर ही रहा। होटल में मन ही नहीं लग रहा था। बस घर जाने की जल्दी थी।
सवाल- शूटिंग में आगे का लक्ष्य क्या है?
जवाब- आइएसएसएफ विश्वकप में क्रिस्चन राईट को विश्व रिकार्ड के साथ हराकर एक सपना तो पूरा हो गया। अब देश के लिए ओलंपिक और कामनवेल्थ गेम्स में पदक हासिल करना ही मेरा अगला लक्ष्य होगा। मुझे खुद पर भरोसा है कि मैं देश को आगे भी सोना दिलाऊंगा।
सवाल- शूटिंग के दौरान दोनों आंखें खोलने का क्या राज है?
जवाब- मैंने बचपन से ही दोनों आंखें खोलकर निशानेबाजी की है। मुझे ऐसे ही आदत पड़ गई। मैं दोनों आंखें खोलकर ज्यादा अच्छा निशाना लगाता हूं।
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शहजर ने जताया अमर उजाला का आभार
मेरठ। कामनवेल्थ गेम्स के लिए दिल्ली में आयोजित ट्रायल्स में चयन न होने के बाद शहजर रिजवी और परिवार के लोग हताश हो गये थे। शहजर ने बताया ट्रायल्स में दूसरा स्थान पाने के बाद भी तीसरे पायदान वाले को कामनवेल्थ में चयन कर लिया गया था। इसके बाद बहुत हताशा हुई, लेकिन पूरे मामले में अमर उजाला ने जिस तरह मेरा साथ दिया। उसके लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगा। अमर उजाला ने मेरे परिवार की हताशा को आशा में बदलने का कार्य किया। मेरा और मेरे परिवार का साहस बढ़ाया। वहीं शुक्रवार को मेरठ पहुंचने के बाद शहजर जैदी फार्म स्थित अपने रिश्तेदार के यहां रुके। देर शाम वो मवाना खुर्द स्थित अपने घर रवाना हो गये। घर पर उनकी मां शहाजमानी, पिता शमशाद रिजवी, पत्नी नाजिया रिजवी, बहन शैला, भाई अहमर रिजवी, मामा मुनव्वर ने उनका स्वागत किया।