सिविल लाइन क्षेत्र के संजय नगर निवासी सीआरपीएफ के एसआई देवेंद्र सिंह बिष्ट मंगलवार तड़के छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंग में शहीद हो गये। देवेंद्र की शुक्रवार को अपने परिजनों से आखिरी बात हुई थी। उसके एक दिन बाद छोटे भाई ने फोन मिलाया तो मोबाइल स्विच ऑफ आया।
18 नवंबर की दोपहर 1:30 बजे देवेंद्र ने अपने छोटे भाई वीरेंद्र को कॉल की थी। पूछा था कि घर पर सब ठीक हैं। विरेंद्र ने देवेंद्र से कहा था कि भाभी को बंगलूरू में शादी में जाना है। मैं इस समय घर पर नहीं हूं। जिसके बाद देवेंद्र ने विरेंद्र से कहा कि मुझे ऑपरेशन पर जाना है... चार दिन मेरा फोन बंद रहेगा। यह सुनते ही विरेंद्र ने अपने बड़े भाई से कहा कि मैं कुछ देर में घर पर पहुंचकर मम्मी और पापा से बात करा दूंगा।
लेकिन देवेंद्र तो ऑपरेशन पर जाने के लिए तैयार हो रहे थे। ऐसे में अपने मम्मी, पापा से बात करने के लिए एक- एक पल की देरी हो रही थी। कुछ देर बाद ही देवेंद्र ने अपने संजय नगर स्थित घर पर कॉल कर पिता भगवान सिंह से बात की। बस यही कहा कि पापा, मैं चार दिन के लिए ऑपरेशन पर जा रहा हूं। इस दौरान मेरा फोन भी बंद रहेगा। जैसे ही समय मिलेगा, मैं बीच में भी बात कर लूंगा। अपने पापा से बात करने के बाद अपनी मां भादी देवी से बात करते हुए ऑपरेशन पर जाने की बात कही तो मां भी भावुक हो गई।
यह थी आखिरी कॉल
परिजनों को नहीं पता था कि देवेंद्र सिंह ऑपरेशन पर जरूर जा रहे हैं। लेकिन यह उनकी आखिरी कॉल होगी। इस बीच छोटे भाई ने फोन मिलाया, लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ आया। चार दिन होने के बाद मंगलवार को परिजन बात करते। लेकिन उससे पहले ही आई कॉल ने पूरे परिवार पर गम का पहाड़ तोड़ दिया। देवेंद्र के शहीद होने की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।
एक माह काटी थी छुट्टी
11 नवंबर को ही देवेंद्र एक माह की छुट्टी काटकर मेरठ से गए थे। घर पर अपनी पत्नी कुमुदी, भाई विरेंद्र, और अपने मम्मी, पापा से कहा था कि अब मैं जा रहा हूं। पहुंचने के बाद फोन पर बात कर लूंगा। फरवरी में फिर छुट्टी आऊंगा। लेकिन न तो देवेंद्र अब छुट्टी पर आएंगे और न ही फोन पर बात होगी।
नक्सली हमले में मेरठ का सीआरपीएफ एसआई शहीद
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के चिंतागुफा व बुरकापाल के बीच चिंतलनार थानाक्षेत्र में मंगलवार तड़के आईईडी ब्लास्ट में सीआरपीएफ 74 बटालियन के उपनिरीक्षक देवेंद्र सिंह बिष्ट (29) पुत्र भगवान सिंह शहीद हो गए। वह मेरठ के संजय नगर सिविल लाइन में रहते थे। उनका परिवार मूलरूप से उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र के मांदापट्टी मखनौली का निवासी है।
मिली जानकारी के अनुसार चिंतागुफा थाने से सीआरपीएफ व जिला बल की संयुक्त पार्टी इलाके में सर्चिंग के लिए रवाना हुई थी। इस बीच बुरकापाल के पास अचानक सड़क में प्लांट किया गया आईईडी ब्लास्ट हो गया। इसकी चपेट में आने से देवेंद्र सिंह बिष्ट शहीद हो गए।
सीआरपीएफ हेडक्वार्टर से मंगलवार सुबह 9:10 बजे मेरठ के संजय नगर में देवेंद्र सिंह बिष्ट के पिता भगवान सिंह के पास फोन आया। जिसमें भगवान सिंह से कहा कि क्या देवेंद्र के परिजनों से बात हो सकती है? यह सुनते ही भगवान सिंह ने कहा कि मैं उनका पिता बोल रहा हूं। कुछ क्षण के लिए तो हेडक्वार्टर से फोन करने वाले भी चुप रह गये। बाद में उनके पिता से कहा कि देवेंद्र टीम के साथ निकले थे और वह शहीद हो गए। बेटे के शहीद होने का पता चलते ही भगवान सिंह बिलख पड़े। माता भादी देवी और छोटे भाई विरेंद्र का भी रो रोकर बुरा हाल हो गया। पड़ोस के लोगों की भीड़ लग गई।
देवेंद्र की पत्नी कुमुदी डेढ़ साल के बेटे के साथ बंगलूरू में रिश्तेदार की शादी में गई हुई हैं। जो आईआईएमटी कॉलेज गंगानगर में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। मंगलवार देर रात तक उनके घर पर लोगों का तांता लगा था। भाजपा विधायक रविन्द्र भड़ाना और सिविल लाइन इंस्पेक्टर भी शहीद देवेंद्र के घर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। शहीद के परिजनों ने कहा कि शव आने के बाद बुधवार को सूरजकुंड पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।