जिला अस्पताल में मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) यूनिट बनकर तैयार हो गई है। यहां करीब सात करोड़ की एमआरआई मशीन से शरीर की जांच होगी। अभी तक जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को एमआरआई स्कैन कराने के लिए या तो मेडिकल कॉलेज या फिर निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर जाना पड़ता था। माना जा रहा है कि करीब डेढ़ माह में यह यूनिट शुरू होने पर मरीजों को काफी सुविधा होगी।
यह है एमआरआई
एमआरआई यानी मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग स्कैन। ये रेडिएशन के बजाय मैग्नेटिक फील्ड पर काम करता है। इसलिए एक्सरे और सीटी स्कैन से अलग है। शरीर के कौन से और कितने हिस्से की जांच करनी है, इसके हिसाब से सामान्यता 20 मिनट से डेढ़ घंटा तक स्कैनिंग में लगता है। एक ऐसी तकनीक है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की सहायता से शरीर के अंगों एवं उनकी कोशिकाओं का स्पष्ट एवं विस्तृत चित्र बनाया जाता है। इस चित्र के माध्यम से शरीर की काफी परेशानियों का पता लगाया जा सकता है।
इन बीमारियों के लिए जांच
जिला अस्पताल में सालाना करीब 4-5 लाख मरीज आते हैं, जिनमें से करीब 3500 मरीजों को एमआरआई की जरूरत होती है। बीपीएल कार्ड धारकों और अन्य निर्धन लोगों के लिए यह सुविधा मुफ्त होगी। जबकि बाकी मरीजों के लिए बहुत कम शुल्क रखा जाएगा। एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल मस्तिष्क, हड्डियों व मांसपेशियों, सॉफ्ट टिश्यू, चेस्ट, ट्यूमर-कैंसर, स्ट्रोक, डिमेंशिया, माइग्रेन, धमनियों के ब्लॉकेज और जेनेटिक डिसऑर्डर का पता लगाने में होता है। बीमारी की सटीक जानकारी लिए यह जांच होती है। जिला अस्पताल से प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल ने बताया कि कोशिश की जा रही है कि जल्द से जल्द यह सुविधा मरीजों को मिले।
5-25 हजार रुपये खर्च
निजी सेंटर पर एमआरआई के 5-25 हजार रुपये तक लिए जाते हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज में गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के लिए यह सुविधा मुफ्त है। बाकी के लिए दो हजार रुपये शुल्क लिया जाता है। जिला अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने से हजारों मरीजों को लाभ मिलेगा। मरीजों को भटकना नहीं पड़ेगा।