खैरनगर वाले रास्ते पर हुआ जलभराव।
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रविवार को निगम अफसरों की लापरवाही एक लड़की की जान ले लेती। सड़क पर जाते स्कूटी समेत एक युवती नाले में समा गई। स्थानीय लोगों ने युवती को बचाया। हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता कि नाले में गिरी उसकी स्कूटी को खोजने में ही आधा घंटा लग गया। बार बार होते हादसों से नगर निगम के अफसर कोई सबक नहीं ले रहे हैं।
शहर के नाले मौत के मुहाने बने हैं। सड़क किनारे नालों में कब कौन समा जाए कुछ नहीं पता। नालों की दीवार तक नहीं बनायी गयी हैं। बारिश में नालों का पानी सड़क पर बहता है, पता ही नहीं चलता कि कहां सड़क है कहां नाला। रविवार को भी शाम के समय बारिश के दौरान नाले सड़कों पर बह निकले। सड़कों पर चलने वाले लोगों को न तो नालों का पता चल पा रहा था न सड़क का। मेट्रो प्लाजा फुटबॉल चौराहा पर शाम सात बजे सड़क पर जा रही स्कूटी सवार युवती स्कूटी समेत नाले में जा गिरी। ये तो गनीमत रहे कि कुछ लोगों ने उसे देख लिया और जैसे तैसे तो युवती को खींच लिया, लेकिन तब तक स्कूटी नाले की गहराई में समा चुकी थी। सूचना पर पहुंचे ट्रैफिक पुलिस कर्मियों और लोगों ने स्कूटी को बाहर निकाला।
नाले में डूबने से कई लोगों की जा चुकी जान
मेरठ। पूर्व में शहर के नाले कई लोगों की जान ले चुके हैं। गत वर्ष जहां दिल्ली रोड पर नाले में गिरने से एक बालक की मौत हो गयी थी। वहीं नेहरूनगर नाले में एक बच्चा समा गया था। तीन-चार दिन बाद उसकी लाश कई किमी. दूर नाले से ही बरामद हुई थी। नालों में गिरकर मरने वालों का सिलसिला यही समाप्त नहीं हुआ है बल्कि भुमिया पुल पर ओडियन नाले में दो अलग अलग स्थानों पर दो युवकों की मौत हो चुकी है। निगम ने बस घटना वाले नालों की दीवार बना दी, बाकी नालों में शायद घटना होने का इंतजार कर रहा है।
इनकी तो कोई गलती नहीं है !
शहर में सड़क किनारे अधिकतर नालों की दीवारें बनायी गयी हैं। कारण है नालों की सफाई सही तरीके से न होना। अगर नालों का पानी तली में बहेगा तो बारिश में न तो सड़कों पर जलभराव होगा और न ही कोई नालों में गिरेगा। फिर भी अगर फुटबॉल चौराहा के निकट नाले की दीवार नहीं है तो उसको दिखवाकर करा दी जाएगी। - कुलभूषण वार्ष्णेय, चीफ इंजीनियर नगर निगम।