आटोमोबाइल कंपनी ने ऑटोमेशन सिस्टम से किया लैस, मई 2022 में बनाया था ट्रेक, एक भी दिन नहीं हुआ इस्तेमाल
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। तीन साल पहले साकेत आईटीआई के पास करोड़ों की लागत से बनाए गए मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट परिसर में ट्रैक और ऑटोमेशन सिस्टम का अभी तक इस्तेमाल शुरू नहीं हुआ है। एक साल पहले सरकार ने इसे आधुनिक रूप से तैयार करने की जिम्मेदारी एक ऑटोमाबाइल कंपनी को दी थी। अब संचालन की स्वीकृति शासन में अटकी हुई है, फिलहाल इंस्टीट्यूट की बिल्डिंग में पुराने तरीके से ही ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जा रहे हैं।
सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ नीचे जाने के लिए सरकार ने मेरठ समेत उप्र के अधिकतर बड़े शहरों में मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट तैयार किए थे। मेरठ साकेत आईटीआई के मैदान में मई 2022 को इंस्टीटयूट की बिल्डिंग और ट्रैक बनाया गया था। बिल्डिंग में परीक्षा के लिए क्लास रूम और अधिकारी कक्ष भी मौजूद हैं। अधिकारी कक्ष को छोड़कर बाकी अन्य रूम का इस्तेमाल ही नहीं हो रहा है। उददेश्य था कि ड्राइविंग लाइसेंस लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहले लिखित परीक्षा होगी इसके बाद ट्रेक पर वाहन चलवाकर देखा जाएगा। तीन साल में एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जिस दिन इस ट्रेक का इस्तेमाल किया गया हो।
इंस्टीट्यूट संचालन से लाइसेंस के फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस पर लगेगी रोक
इसके शुरू होने से गाड़ी चलाने में निपुण व्यक्ति का ही डीएल बन सकेगा। यानी व्यक्ति को ट्रेक पर वाहन चलाकर दिखाना पड़ेगा। ट्रेक पर गाड़ी और चालक की निगरानी सीसीटीवी कैमरे और सेंसर से होगी। यातायात नियम तोड़ने वाले को ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं हो सकेगा। पूरी तरह प्रशिक्षित व्यक्ति को ही ड्राइविंग लाइसेंंस बन सकेगा। इतना ही नहीं एक बार फेल होने पर दोबारा ड्राइविंग परीक्षा देने के लिए व्यक्ति को 300 रुपये सरकारी खजाने में जमा करने पड़ेंगे।
कंपनी शीघ्र शुरू करेगी ड्राइविंग इंस्टीटयूट -
ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीटयूट के संचालन की जिम्मेदारी प्राइवेट ऑटोमोबाइल कंपनी को दी हुई है। ऑटोमेशन का कार्य पूरा हो चुका है। संचालन के लिए कर्मचारियों की तैनाती की प्रक्रिया शासन स्तर से होनी थी। उम्मीद है कि यह जल्द पूरे नियमों के साथ संचालित हो जाएगा। - विंध्याचल, आरआई,संभागीय परिवहन विभाग।