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मोतियों के पालने में झूलेंगे नंदलाल

Sun, 21 Aug 2016 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 कान्हा के जन्मदिन के लिए बाजार सज गए हैं। उनके सिंहासन से लेकर बिस्तर, अंग वस्त्र की कई वैरायटी मार्केट में हैं। प्रोडक्ट के अनुसार उनकी कीमत तय है। लड्डू गोपाल की मूर्ति 55 रुपये से दस हजार तक में मिल रही है। शहरवासी जमकर खरीदारी कर रहे हैं। दुकानों पर बांसुरी, शृंगार का सामान, मोतियों की माला, पालना एक से बढ़कर एक है। पीतल, जरकन की बनीं मूर्तियों श्रद्धालुओं को लुभा रही हैं। सोने सा दिखने वाले सिंहासन से भी नजर हट नहीं रही है। अंग वस्त्र तो मखमली हैं।
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55 रुपये से दस हजार के कन्हैया
बाजार में 55 रुपये से लेकर 10 हजार तक के कान्हा मिल रहे हैं। लंबाई और चौड़ाई के अनुसार मूर्तियों की कीमत है। पीतल के कान्हा अधिक डिमांड में हैं। कई मूर्तियां तो सोने की तरह लग रही हैं। दुकानदारों के अनुसार इन मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ाई गई है। ये देखने में काफी सुंदर लग रही हैं। लोग इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं।

ऐसी हैं कन्हैया की मूर्ति
भगवान श्रीकृष्ण रंग बिरंगे वस्त्रों में सजे हैं। जहां पीतल के लड्डू गोपाल सुंदर वस्त्रों में सजकर पलने में झूल रहे हैं, वहीं मनमोहक बांसुरी बजाते कन्हैया भक्तों को रिझाते नजर आ रहे हैं। बाजार में उपलब्ध भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियां मुंबई में तैयार की गई हैं।
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कान्हा का शृंगार
जरकन से तैयार सिंहासन - 8200 रुपये
झूला झूलती पीतल से बनी कन्हैया की मूर्ति 5600 रुपये
भगवान श्रीकृष्ण की मोतियों की माला -  40- 600 रुपये
पीतल के लडडू गोपाल -  10- 2200 रुपये
कन्हैया की बांसुरी    -  10- 400 रुपये
भगवान श्रीकृष्ण के कुंडल - 20-60 रुपये
नंद गोपाल का बिस्तर    - 25- 90 रुपये
कन्हैया के वस्त्र -   55- 8 हजार रुपये

मुंबई में तैयार होती है मूर्ति
शृंगार विक्रेता अतुल गुप्ता का कहना है कि जरकन से बनी भगवान की मूर्तियां मुंबई में तैयार की जाती हैं, जबकि कन्हैया के वस्त्र मेरठ में ही बनते हैं। पिछली साल के मुकाबले इस वर्ष 10 प्रतिशत महंगाई बढ़ी है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कन्हैया की मूर्ति और शृंगार की विक्री हर साल बढ़ती है। इस बार भी कारोबार अधिक होने की उम्मीद है। श्रद्धालु दुकान पर पहुंचने शुरू हो गए हैं।
 
मंदिरों में मचेगी धूम
24-25 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इसके लिए मंदिरों में अभी से तैयारी शुरू हो गई है। दो दिन तक मंदिरों में पूजा अर्चना की जाएगी। रात भर जागरण और धार्मिक कार्यक्रम होंगे। इस्कान की ओर से पांच दिन तक भैसाली मैदान में भव्य आयोजन होगा। इसमें देशभर के श्रद्धालु हिस्सा लेंगे।
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