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Mother's Day: भारत मां की रक्षा के लिए न्योछावर किए बेटे, सीमा पर तैनात शूरवीरों की माताओं को देश करता है नमन

Sun, 11 May 2025 01:35 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

अपने पराक्रम से पाकिस्तानी सेना के मंसूबों को नेस्तनाबूत करने वाले भारतीय सेना के वीर सैनिकों के पराक्रम को आज पूरा देश सलाम कर रहा है।
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मदर्स डे - फोटो : Amar ujala
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अपने पराक्रम से पाकिस्तानी सेना के मंसूबों को नेस्तनाबूत करने वाले भारतीय सेना के वीर सैनिकों के पराक्रम को आज पूरा देश सलाम कर रहा है। देश के पराक्रमी सैनिकों का जो साहस और शौर्य आज पूरा देश देख रहा है, इसके पीछे उनकी माताओं का संघर्ष और बलिदान है।

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वीरों की इन माताओं को आज पूरा देश श्रद्धा और सम्मान के साथ नमन कर रहा है। मातृ दिवस के अवसर पर अमर उजाला की टीम ने वीरों की माताओं से मिलकर देश के लिए उनके संघर्ष और बलिदान को जनता के सामने लाने का एक प्रयास किया है। पेश हैं बॉर्डर पर तैनात वीर जवानों की माताओं से हुई बातचीत के प्रमुख अंश।

मां की प्रेरणा से ही आज चौथी पीढ़ी सेना में
पल्लवपुरम फेज दो निवासी स्वर्गीय कैप्टन जेपीएस राणा के बेटे कर्नल अरविंद राणा भी सेना में कर्नल में है। उनकी वर्तमान में पोस्टिंग गृह मंत्रालय में है। कर्नल अरविंद राणा के पिता जेपीएस राणा भी सेना में कैप्टन रह चुके है। अब उनकी चौथी पीढ़ी सेना में है। वह भी देशभक्ति के जज्बे के साथ सेना में हैं। उनकी पत्नी पारुल कुमार और दो बेटे है। अरविंद कुमार का कहना है कि उनकी मां तारा का उनके जीवन में बहुत योगदान है। उनकी प्रेरणा से ही वह सेना में है। उनका जज्बा और हौसला देश के प्रति हमेशा नयी उर्जा देता है। उनका यही कहना है कि बेटा देश के लिए सेना में भर्ती हुए हो। हमेशा देश के लिए लडऩा और काम करना।

सगे भाईयों के पांच बेटे बार्डर पर निभा रहे फर्ज
सरूरपुर ब्लाक के गांव बपारसी निवासी कमलेश देवी ने बताया कि करीब दस साल पहले बीमारी के चलते उनके पति सुभाष मृत्यु हो गई थी। अब उनके चार बेटे दुष्यंत, दीपक, मोहन, सोहन सेना में भर्ती होकर भारत मां सेवा कर रहे हैं। उन्हें फख्र है कि उन्होंने ऐसे वीर सपूतों को जन्म दिया है। इस समय उनका बेटा दुष्यंत व सोहन कश्मीर मेंं सीमा पर भारत की रक्षा कर रहा है।

मोहन जैसेलमेर जबकि दीपक जबलपुर में सेना में तैनात हैं। कमलेश देवी ने बताया कि पति सुभाष के जाने के बाद वह अकेली पड़ गई थी। घर व बच्चों की जिम्मेदारी से वह पीछे नहीं हटी। बड़े बेटे ने हौसला दिया। पढ़ाई के साथ उसके बेटों ने खेती में उसका हाथ बटाया। साथ ही सेना में भर्ती के लिए अपनी तैयारी करते रहे। उसके बाद एक के बाद एक उसके चारों बेटों ने सेना में भर्ती होकर देश व उसका नाम रोशन किया है। आज चारों बेटे पाकिस्तान को उसकी ही भाषा में जवाब दे रहे हैं।

देवरानी भी पीछे नहीं
गांव बपारसी निवासी कमलेश की देवरानी बबली देवी भी उनसे पीछे नहीं रही। इकलौता बेटा अक्षय भी अपने भाईयों के नक्शे कदम पर चलते हुए कश्मीर में तैनात है। बबली ने बताया कि जब अक्षय बारह साल का था तो उसके पति अशोक की हार्ट अटैक से मौत हो गई। गम को अपने सीने में दबाकर उसने बच्चों के भविष्य पर ध्यान दिया। बताया कि उसका बेटा जब छोटा था तो वह चचेरे भाईयों को सेना की तैयारी करते हुए देखता था। आज सेना में भर्ती होकर दोनों विधवा देवरानी व जेठानी के पांचों बेटे अपनी सेवा दे रहे हैं।

-बेटे पर गर्व, पोता भी कर रहा आर्मी की तैयारी
सरधना क्षेत्र के नया गांव निवासी संतोष गोस्वामी ने बताया कि उनका बड़ा बेटा जितेंद्र गोस्वामी 1995 में आर्मी में भर्ती हुआ था। बेटे की पोस्टिंग असम में चल रही है। बेटा हवलदार के पद पर तैनात है। उन्होंने कहा कि बेटे की तरह पोता भी आर्मी में जाने के लिए तैयारी कर रहा है। देश सेवा से बड़ा कुछ नहीं है।

मेरा बेटा सेना में है, मुझे गर्व है
गंगानगर एचटी ब्लॉक निवासी मिथलेश रानी के बेटे गौरव चौधरी सीडीएस से 2015 में लेफ्टिनेंट कर्नल बने। वर्तमान में इनकी तैनाती पटानकोट में है। मां मिथलेश के मुताबिक इस समय सरहद पर जंग चल रही है। मेरा बेटा भी वहीं तैनात है, बात करने का मन तो रहा है पर शाम को मैसेज से ही बात हो पाती है। मातृ दिवस को लेकर वह कहती हैं कि सबसे बड़ा उपहार मेरे लिए बेटा ही है जो अपने देश की सेवा में लगा है। उन्होंने बताया कि 26 अप्रैल को ही बेटा छुट्टी पर आने वाला था, परंतु 22 में पहलगाम घटना से वह रुक गया।
 
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बेटे ने किया सपना पूरा किया
रोहटा रोड शालीमार गार्डन निवासी सुषमा देवी के 25 वर्षीय बेटे आशीष शर्मा सेना में कैप्टन हैं। अभी पश्चिम बंगाल के बिन्नागुड़ी में तैनात हैं। टीएस के माध्यम से सेना में पहुंचे। सुषमा बताती हैं कि जनवरी में छुट्टी पर आया था। अब मई में आना था, परंतु पाकिस्तान से तनाव के चलते छुट्टिया निरस्त कर दीं। उन्होंने बताया कि मेरा सपना था कि बेटा सेना में होना चाहिए, जिसे आशीष ने पूरा किया है। पिता भी सूबेदार से सेवानिवृत्त हैं। मेरा बड़ा बेटा भी सरकारी शिक्षक है। एक मां के लिए यही चाहिए होता है कि उनके बच्चे कामयाब हो जाएं। मेरे लिए तो खुशी और भी बढ़ जाती है कि बेटा देश सेवा में है।

दुश्मन से लड़ने को मां शक्ति देती है
गंगानगर राधागार्डन निवासी मधु देशवाल के बेटे मयंक देशवाल सेना में मेजर हैं। वह जम्मू-कश्मीर के पुंछ राजौरी में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि सीडीएस के माध्यम से वह 2015 में सेना में पहुंचा। अभी घर आया हुआ है, परंतु सरहद से वापसी का संदेशा आ गया है। वह बताती हैं कि एक मां बेटे को देश के दुश्मनों से मिली चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देती है। निस्वार्थ भाव से अपना सारा स्नेह देने वाली मां को कई त्याग भी करने पड़ते हैं। जो मैंने भी किए हैं। मेरा बेटा सेना में है। यह पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है।

पति से मिली बच्चों को फौज में भेजने की प्रेरणा
रोहटा रोड निवासी सावित्री तोमर का कहना है कि मेरे पति रामपाल सिंह आर्मी में सूबेदार थे, जिनसे प्रेरणा लेकर मैंने दोनों बेटों को आर्मी में भेजने का मन बना लिया था। बच्चों को पढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत की, जिसका फल मुझे बच्चों ने अवसर बनकर दिया। मेरा बड़ा बेटा राजीव एयरफोर्स से सेवानिवृत्त हो चुका है और छोटा बेटा प्रवीण तोमर कर्नल है। इस समय दिल्ली में कार्यरत है। प्रवीण तोमर ने कारगिल युद्ध में तोलोलिंग पहाड़ी फतह की और सेना मेडल प्राप्त किया था। सावित्री बताती हैं कि उन्होंने बच्चों को अच्छे संस्कार दिए हैं। मुझे गर्व है कि मेरा बेटा सेना में पदक भी ले चुका है।
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