शामली के शांति मोहल्ला निवासी सोमती के पति की बीमारी के कारण मौत हो गई। घर में छह छोटे छोटे बच्चे थे। कमाने वाला कोई नहीं रहा। दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़ गए । कभी कभी तो भूखे पेट भी सोना पड़ा, लेकिन सोमती ने हार नहीं मानी। मन मजबूत किया और घर में ही सिलाई-बुनाई का काम शुरू कर दिया । अपने जज्बे और मेहनत के बूते उसने बच्चों को पढ़ाया लिखाया और काबिल बनाया। आज परिवार में पूरी खुशियां हैं।
शहर के शांति मोहल्ला निवासी सोमती देवी के पति इलम चंद की शहर में किराए की दुकान थी। घर में तीन बेटी अंजू, मंजू, रेखा, रजनी और दो बेटे राजन और राजीव थे। जब बड़ी बेटी अंजू जब केवल 13 साल और सबसे छोटा बेटा राजीव केवल दो साल का था, तो इलम चंद की बीमारी के चलते मौत हो गई। बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। वहीं, घर में एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।