श्री मदनानंद वैदिक वानप्रस्थ वृद्ध आश्रम में आठ महिलाएं रहती हैं। कमला भी उन्हीं में से एक है। पति की काफी पहले मौत हो गई थी। बेटा हरिद्वार में कहीं रहता है, लेकिन उसने कभी मां की सुध नहीं ली। भगवती, माया, कमला देवी और अरुणा भी यहीं पर रहती हैं। परिवार का जिक्र छेड़ते ही कहती हैं कि उन्हें किसी से शिकवा नहीं। परिवार में कौन-कौन हैं, यह भी नहीं बताना चाहती। कहती हैं कि आश्रम और जनता के सहयोग से उनका जीवन कट रहा है।
उधर, शहर के नई मंडी क्षेत्र में संचालित मुक्ता महिला आश्रम में रहने वाली कमलेश का कोई पुत्र नहीं है। लंबे समय से आश्रम में रह रही हैं। परिवार के बारे में पूछने पर कहती हैं कि तीन बेटियां हैं। उनका विवाह कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी, अब बेटियों की गृहस्थी पर बोझ नहीं बनना चाहती। इसलिए यहां रह रही हैं।
कांता देवी, कैलाशो, मीरा, राजकुमारी और श्यामो देवी कहती हैं कि परिवार में किसी का सहारा होता तो उन्हें यहां रहने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। सुशीला देवी का कोई पुत्र नहीं है। बेटी परिवार के साथ नोएडा में रहती है। कभी-कभार बेटी के पास जाती हैं और कुछ दिन ठहर कर लौट आती हैं।
कहती हैं कि हर परिवार की अपनी कहानी हैं। बताती हैं कि यहां रहने वाली एक अन्य महिला का भरापूरा परिवार है, लेकिन वह भी यहां रहने को मजबूर है। उसे देखकर लगता है कि यदि उनका बेटा और बहू होते तो इस बात की क्या गारंटी थी कि उन्हें आश्रम में नहीं रहना पड़ता। उन्होंने जीवन को अपने तरीके से जीना सीख लिया है।
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