हस्तिनापुर। ऐतिहासिक नगरी के पांडव टीले पर मौजूद प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में नवरात्रों के चौथे दिन माता के कूष्मांडा स्वरूप की विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई। भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष संदीप प्रधान ने जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।
बृहस्पतिवार को जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि सनातन धर्म में नवरात्रि के अवसर पर शक्ति की साधना का बहुत अधिक महत्व होता है। मान्यता के अनुसार, दुर्गा मां के इस रूप की आराधना करने से मां कूष्मांडा अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के साथ उनके सभी दुखों का नाश करती है।
आचार्य मुकेश शांडिल्य ने माता की कथा सुनाते हुए कहा कि देवी कूष्मांडा अपने भक्तों को रोग, शोक और विनाश से मुक्त करके आयु, यश, बल और बुद्धि प्रदान करती हैं।
मां कूष्मांडा का वाहन सिंह है और आदिशक्ति की आठ भुजाएं हैं। इनमें से सात हाथों में कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, कमंडल और कुछ शस्त्र जैसे धनुष, बाण, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। मान्यता है कि माता को कुम्हड़े की बलि बेहद प्रिय है। वहीं कुम्हड़े को संस्कृत में कूष्मांडा कहते हैं। इसके बाद महा आरती की गई। माता को हलवा, मीठा, दही का भोग लगाया गया। अमृत प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। इस अवसर पर कृष्ण सैनी विशु शर्मा, मोहित शर्मा, चंद्र प्रकाश शुक्ला सीमा गुर्जर ज्योति शर्मा सीमा गुर्जर आदि उपस्थित रहे।