शहर का दिल कहा जाने वाला घंटाघर भी अतिक्रमणकारियों की चपेट में हैं। सुबह से शाम तक यहां जाम की स्थिति बनी रहती है। एक ओर दुकानदारों ने तो दूसरी तरफ ठेली विक्रेताओं के कब्जे से मुख्य सड़क गली में तब्दील हो गई है। नगर निगम मुख्यालय से चंद कदमों की दूरी पर होने के बाद भी निगम अफसरों का इस ओर ध्यान नहीं जाता है। दिन भर यहां से निकलने वाले वाहन चालकों को जाम से जूझना पड़ता है।
ढाई माह पहले हटाया था अतिक्रमण
उप्र में योगी सरकार बनते ही नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस ने सबसे पहले अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई शुरू की। शहर में विभिन्न स्थानों के साथ घंटाघर के आसपास के इलाके में भी अतिक्रमण अभियान चला। लेकिन ढाई माह बाद ही स्थिति जस की तस हो गई। अब अगर घंटाघर के अंदर लाला बाजार की तरफ जाएं तो वह पूरी तरह अतिक्रमण की चपेट में हैं। मुख्य मार्ग से वाहनों से तो क्या पैदल चलना भी दुश्वार है।
ठेली वालों से घिरी सड़क
घंटाघर के अंदर लाला के बाजार की तरफ जाने वाले मार्ग पर जहां तक डिवाइडर बना है। उसका सहारा लेकर ठेले वालों ने फलों की दुकानें सजा रखी हैं। सड़क को करीब पांच-पांच फुट घेर रखा है। इनके साथ स्थायी दुकानदारों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। दुकान के अंदर जितना सामान है, उससे ज्यादा उन्होंने फुटपाथ और सड़क पर सजा रखा है। इसके कारण मार्ग पूरी तरह जाम की चपेट में है।