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यूपी: टैंकों में भरा 2.20 लाख लीटर नकली तेल मेरठ पुलिस के लिए बना चुनौती 

Sun, 25 Aug 2019 02:20 PM IST
Dimple Sirohi मनु चौधरी/संजय तिवारी, अमर उजाला, मेरठ
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नकली पेट्रोल-डीजल - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ में डुंगरावली के पास जहां तेल के काले कारोबार से जुड़ी फैक्टरी चल रही थी, वहां के भूमिगत टैंकों से करीब 2.20 लाख लीटर मिलावटी तेल बाहर निकालना पुलिस के लिए चुनौती है। बड़ी बात ये है कि अति संवेदनशील क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा समय से चल रहे इस अवैध धंधे पर कार्रवाई तक का प्रयास नहीं किया गया। 
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वेदव्यासपुरी परतापुर में जिस जगह तेल का काला कारोबार चल रहा था, वह क्षेत्र संवेदनशील माना जाता है। आधा किमी की दूरी पर आरएएफ 108 वाहिनी का परिसर है। एनएच-58 से चंद कदमों की दूरी पर है। फैक्टरी लंबे चौड़े परिसर में फैली है। ऊंची दीवारें हैं।

मुख्य गेट पर पारस केमिकल्स लिखा मिला।  बाहर से ऐसा लगता है कि जैसे कोई केमिकल फैक्टरी है। फैक्टरी के मुख्य गेट से करीब 30 मीटर की दूरी पर रास्ते के नीचे से आईओसीएल की पाइप लाइन बिछी है, जो पूठा तेल डिपो तक जाती है। 
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ये है अंदर का हाल 
फैक्टरी के अंदर का हाल देखकर साफ पता चलता है कि यहां कई वर्षों से मिलावटी तेल का धंधा चल रहा था। मुख्य गेट के अंदर एक कमरा बना है। उसके बाद जंग लगा एक टैंक दबा हुआ है, जो खाली पड़ा है और आधा मिट्टी में है। आग बुझाने के लिए लोहे की पाइप लाइन भी जोड़ी गई है।

उसके बाद मिट्टी में अलग अलग स्थानों पर लाइनों में टैंक दबे हैं। जो मुख्य भूमिगत टैंक है वहां पर दो टैंकर एक साथ खड़े होकर पंपिंग मशीन से भरे जाते थे। उसके बाद करीब बीस से अधिक टैंक दूसरी लाइन में दबे हुए हैं। इनमें दो टैंक खाली बताए गए। सभी टैंकों में  मिलावटी डीजल व पेट्रोल  भरा है। सभी टैंकों से तेल निकालने के लिए लोहे के पाइप लगे हैं। फैक्टरी में आधे भाग पर हरी घास है, जहां से पाइप ही दिखाई देते हैं। भूमिगत टैंक दिखाई नहीं देते। 

केमिकल की आड़ में तेल का खेल
नकली तेल का खेल करने वाले कारोबारियों ने केमिकल फैक्टरी का लाइसेंस लिया हुआ है। उसकी आड़ में साल्वेंट, थिनर और बेंजीन आदि को खरीदते हैं। उससे तैयार होने वाले कई उत्पाद तैयार करने की बात करते हैं। लेकिन इसके पीछे नकली तेल का कारोबार है।

सूत्रों के अनुसार तेल तैयार करने में केमिकल से जो गंध उठती है, उससे पैदा होने वाले शक को दूर करने के लिए केमिकल फैक्टरी की आड़ ली जाती है। वहीं इस लाइसेंस के आधार पर आसानी से साल्वेंट, थिनर और बेंजीन आदि से तेल तैयार करते हैं। 

आपूर्ति विभाग पर सवाल 
साल्वेंट, थिनर और बेंजीन आदि ज्वलनशील पदार्थ हैं। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी आपूर्ति विभाग की है। लेकिन यहां कभी भी स्टॉक की जांच नहीं की गई। साठगांठ के इस खेल में सबसे बड़ा सवाल आपूर्ति विभाग को लेकर ही उठ रहा है। क्योंकि न तो विभाग ने इस तरह की केमिकल फैक्टरियों और न ही कभी पेट्रोल पंपों पर मिलावटी तेल की ही ठीक से जांच की। अपनी तरफ से कभी कोई अभियान चलाया हो, ऐसा भी कभी नजर नहीं आया।   

कैसे नष्ट होगा ये तेल
पुलिस अफसरों का कहना है कि करीब 2.20 लाख लीटर मिलावटी तेल भूमिगत टैंकों में है। इसे कैसे निकाला जाए, क्योंकि पुलिस के पास टैंकर भी नहीं हैं, जिनमें निकालकर तेल भरा जा सकता है। एक टैंकर मौके पर ही खड़ा है। ऐसे में तेल निकाला भी गया तो वह नष्ट कैसे होगा। फिलहाल अफसर कह रहे हैं पुलिस कोर्ट के निर्देश पर कार्रवाई करेगी। यदि यहां कोई अप्रिय घटना हो गई तो आसपास का क्षेत्र भी चपेट में आ सकता है।

यहीं लगी थी पाइप लाइन में सेंध
पुलिस के अनुसार इसी स्थान से कुछ दूरी पर भूमिगत पाइप लाइन को ब्रेक किया गया था। आईओसीएल के अधिकारियों को दो फरवरी 2014 को पाइप लाइन के प्रेशर में गिरावट का पता लगा था। जिसके बाद तत्कालीन एसपी सिटी ओपी सिंह ने यहां तेल का खेल पकड़ा था। मौके पर जो टैंकर मिला, उसकी क्षमता करीब आठ हजार लीटर बताई गई थी। दो टैंकर डीजल यहां से निकाला जा रहा था। पाइप लाइन काटकर तेल चुराने का पहला बड़ा मामला सामने आया था। जबकि टैंकरों से तेल चोरी के मामले सामने आते रहे हैं। जिसमें पुलिस ने मुख्य आरोपी ज्ञानेंद्र चौधरी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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तीन प्रयोगशालाओं में भेजे जाएंगे तेल के नमूने
मिलावटी तेल के सैंपलों को फरीदाबाद, रुड़की और गाजियाबाद की प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। एसआईटी की टीम ने जिला आपूर्ति अधिकारी को चिट्ठी भेजकर सैंपल मांगे है। एसआईटी के इस पत्र के बाद आपूर्ति विभाग के साथ ही तेल माफिया में हड़कंप मचा है। पुलिस की मौजूदगी में जिला आपूर्ति की टीम ने दो तेल माफिया की फैक्टरी से सैंपल लिए थे। सैंपल बदले जा सकते हैं, इसकी चर्चा चलने पर एसआईटी ने अलग-अलग तीन लैबों में सैंपल भेजकर जांच करने की बात कही है।

इसको देखते जिला आपूर्ति अधिकारी को पत्र भेजकर सैंपल मांगे है। उन्होंने सैंपल पहले ही जांच के लिए गाजियाबाद लैब भेज दिए हैं। मामले में जिला आपूर्ति अधिकारी विकास गौतम का कहना है कि आगरा में सरकारी लैब थी। लेकिन अब गाजियाबाद के निवाड़ी गांव में लैब बनी है। डीएम के निर्देश पर ही तीनों सैंपल गाजियाबाद भेजे हैं। पुलिस अपने स्तर से जांच कर रही है तो वह तीनों लैब में जांच करा सकती है।  

गैंगेस्टर एक्ट में होगी कार्रवाई
एसएसपी के अनुसार तेल माफियाओं पर गैंगेस्टर में कार्रवाई होगी। मिलावटी तेल कहां-कहां सप्लाई होता है, इसकी जांच के लिए एसआईटी की टीम पंजाब और हरियाणा पहुंच गई है।  जिन पेट्रोल पंपों पर नकली तेल सप्लाई होता था, उसका भी पर्दाफाश होगा। एसआईटी की जांच में जिस आरोपी का नाम सामने आएगा, उसको पुलिस सीधे जेल भेजेगी। 

मिलावटी तेल से वाहनों के इंजन खराब 
 पेट्रोल पंपों पर मिलावटी तेल से वाहनों के इंजन खराब हुए हैं, इसकी शिकायत पुलिस अधिकारियों के पास पहुंचने लगी है। शनिवार को आईजी आलोक सिंह के पास दो शिकायतें पहुंचीं। आरोप कि पेट्रोल पंपों से तेल वाहन में डलवाया था, उससे उनके वाहनों के इंजन खराब हो गए हैं। आईजी ने दोनों पेट्रोल पंपों की जांच के बाद रिपोर्ट दर्ज कराने का आश्वासन दिया है। 
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