फर्जी नियुक्ति में फंस सकते हैं 20 से ज्यादा शिक्षक
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय कैंपस और कॉलेजों में 20 से ज्यादा शिक्षक फर्जी नियुक्ति के मामले में फंस सकते हैं। इनमें से कई शिक्षकों की आवेदन करने के दौरान निर्धारित शैक्षिक योग्यता पूरी नहीं थी। इसके बावजूद ये भर्ती कर लिए गए। इस मामले में चार अगस्त तक जांच कमेटी को रिपोर्ट देनी है।
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद प्रदेश सरकार विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्तियों की भी जांच करा रही है। उनके शैक्षिक प्रमाण पत्र चेक किए जा रहे हैं। उनके चयन की श्रेणी की भी जांच की जा रही है। इसमें अब तक 20 से अधिक संदिग्ध शिक्षक सीसीएसयू के परिक्षेत्र में सामने आए हैं। मेरठ के क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी से इनके प्रमाण पत्रों की गहनता से जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जांच में लापरवाही हुई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीसीएसयू कैंपस में शिक्षकों की जांच अलग कमेटी ने की है। वहीं, कॉलेजों के शिक्षकों की जांच मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में राजकीय डिग्री कॉलेज के शिक्षकों की समितियां कर रही हैं।
कैंपस के पांच शिक्षक घेरे में
सीसीएसयू कैंपस के पांच शिक्षकों की नियुक्तियां संदेह के घेरे में हैं। एक शिक्षक के मामले में शिकायत है कि उन्होंने जब आवेदन किया तो वे नेट क्वालीफाई नहीं थे। एक शिक्षक के बारे में शिकायत है कि उनके प्रमाण पत्रों में गड़बड़ के साथ नेट भी क्वालीफाई नहीं था। आरोप है कि इनके 55 फीसदी अंक नहीं थे। इनको पूरा कराने के लिए 12 वर्ष में डिविजन इंप्रूवमेंट दिलाया गया। तीसरे शिक्षक पर भी शैक्षिक प्रमाण पत्रों को लेकर डिविजन इंप्रूवमेंट गलत तरीके से देने के आरोप है। एक शिक्षक को पुरानी तिथि में रेग्युलर करने की शिकायत है। पांच शिक्षकों के बारे में गंभीर शिकायतें होने के बाद समिति अब इनके कागजात दोबारा से जांचेगी। इसके अतिरिक्त कॉलेजों में भी 15 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति पर सवाल उठ रहे हैं।
विवि से गायब हैं आरक्षण रोस्टर रजिस्टर
विवि में भर्तियों में बड़े-बड़े घोटाले हो चुके हैं। कभी यहां पर कैंपस के हिसाब से आरक्षण रोस्टर लागू किया गया तो कभी विभागवार। इतना ही नहीं साल 2010 तक कई कुलपति ने अपने लोगों को नियुक्त करने के लिए आरक्षण रोस्टर रजिस्टर ही गायब करा दिए थे। ऐसे में रोस्टर आरक्षण का रिकॉर्ड ही नहीं है।
ईमानदारी से जांच हुई बचना मुश्किल
शिक्षकों के तार कई बड़े नेताओं से जुड़े हैं। ऐसे में शिकायत के बावजूद गंभीर आरोप दबाए जाते रहेे हैं। इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अफसरों को पारदर्शिता के साथ जांच करने के आदेश दिए हैं। ऐसे में ये शिक्षक फंस सकते हैं।