स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कहें या पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों या फिर पुलिसवालों का अनदेखी। वजह चाहे जो कहें, मगर हकीकत यह है कि मोर्चरी में मुर्दों के लिए आए दो फ्रिज अब कबाड़ बन चुके हैं। लंबे समय से इनका प्रयोग ही नहीं किया गया है। यह हालात तब हैं जबकि मोर्चरी में हर साल एक से डेढ़ हजार शव आते हैं। इनमें दो सौ से ढाई सौ लावारिस होते हैं। उनकी पहचान के लिए 72 घंटे तक रखना पड़ता है। कई बार यहां शव में कीड़े पड़ जाते हैं। पुलिसकर्मी गश खा जाते हैं। करीब दो माह पहले सड़ चुके शव को देखकर एक महिला सिपाही बेहोश हो गई थी। इसके बावजूद इसकी कोई सुध नहीं ली गई। नतीजतन, फ्रिज जंग लगकर खराब हो गए। मेडिकल सूत्रों का कहना है कि सरकार द्वारा भेजे गए मुर्दों के फ्रिज को पिछले 2005 से प्रयोग नहीं किया गया है। शव को खराब होने से बचाने के लिए यह फ्रिज लाए गए थे। इनमें दो शव रखे जा सकते थे।
दो नए फ्रिज आए, नहीं हुए चालू
मोर्चरी में करीब एक माह पहले दो नए फ्रिज आ गए हैं। इनमें से एक फ्रिज में चार शव रखे जा सकते हैं और दूसरे में दो शव। हालांकि यह अभी तक शुरू नहीं किए जा सके हैं। इस संबंध में कार्यवाहक मुख्य चिकित्साधिकारी धीरेंद्र कुमार ने बताया कि इनकी अभी सही तरह से सेटिंग नहीं हो पाई है। सेटिंग कराकर जल्द ही इन्हें चालू कराया जाएगा।