इस बार मानसून को लेकर को जो आशंकाएं चल रही हैं, अगर वह सही रहीं तो स्थिति बहुत विकट हो जाएगी। मानसून की गति तय करेगी कि वेस्ट यूपी में बारिश कब होगी। अभी मानसून ने केरल में ही दस्तक नहीं दी है। केरल से वेस्ट यूपी और एनसीआर तक पहुंचने में करीब एक माह लगता है। अगर गति बढ़ती है तो मानसून समय से पहुंच सकता है। मानसून से पहले होने वाली बारिश भी धोखा दे रही है। जिस कारण से गर्मी अपने चरम पर है।
वेस्ट यूपी में मानसून से पहले होने वाली बारिश इस बार धोखा दे गई। यही कारण रहा कि गर्मी इस समय प्रचंड रूप में है। हालात ऐसे हैं कि दिन में चिलचिलाती धूप में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। पिछले वर्ष मानसून अच्छा रहा तो बारिश भी अच्छी हो गई थी। लेकिन इस बार भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने पहले ही संभावना जताई है कि इस बार मानसून सामान्य ही रहेगा। इसका असर वेस्ट यूपी में भी दिखाई देगा। मानसून की स्पीड तय करेगी कि वेस्ट यूपी में बारिश कब होगी। वैसे भी इस बार प्रचंड गर्मी पड़ रही है। लेकिन अभी बारिश दूर है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो जब प्रचंड गर्मी होती है तो मानसून भी अच्छा होता है और बारिश भी अच्छी होती है। लेकिन इस बार शुरुआत में ही बारिश के लिए जूझना पड़ रहा है। सोमवार को भी गर्मी का असर कम नही था। दिन में पुरवाई हवा चलने के चलते तापमान स्थिर रहा। मौसम कार्यालय पर अधिकतम तापमान 38.6 डिग्री व न्यूनतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। अधिकतम आर्द्रता 57 व न्यूनतम 39 प्रतिशत दर्ज की गई।
अभी एक सप्ताह देर से पहुंचेगा केरल
मोदीपुरम। आईआईएफएसआर के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एन. सुभाष का कहना है कि केरल में एक जून को पहुंचने वाला मानसून इस बार करीब 7-8 जून को पहुंचेगा। वहां से करीब एक माह में यहां तक मानसून पहुंचेगा। अभी तक मानसून धीमा चल रहा है। अभी तक जो रिपोर्ट आ रही हैं, उसके अनुसार मानसून सामान्य से कम ही रहेगा। अगर मानसून कम रहेगा तो गर्मी के साथ पानी की भी दिक्कत कई जगह देखने को मिलेगी।
मानसून की देरी से ये होंगी परेशानी
- इस बार प्री मानसून बारिश नहीं हुई है।
- मानसून से पहले प्री मानसून बारिश बहुत जरूरी है।
- बारिश न होने के कारण खेतों में नमी नहीं है।
- मानसून की देरी से फसलों का फसल चक्र भी गड़बड़ा जाता है।
- मानसून की देरी से भूजल स्तर पर भी असर पड़ता है।
- ग्लोबल वार्मिंग का असर मानसून पर भी दिखाई दे रहा है।
- बारिश कम होने से सबसे ज्यादा धान की फसल प्रभावित होगी।
- मानसून की बारिश से ही वेस्ट यूपी में धान की बुवाई होती है, जिसका फसल मेें अच्छा लाभ मिलता है।
- इस बार तो बिना बारिश के चारे की फसल के लिए भी किसानों को ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ा।
पिछले साल यह थी स्थिति
मौसम विभाग के अनुसार केरल में मानसून तीन दिन पहले ही मानसून पहुंच गया था। जिस कारण से यूपी में भी मानसून की जोरदार एंट्री हुई। मेरठ में मानसून के आने का समय 27 जून है। लेकिन पिछले कई वर्षों में मानसून जुलाई के प्रथम सप्ताह में ही आता है। मौसम विज्ञानी डॉ. एन सुभाष का कहना है कि पिछले साल मानसून अच्छा रहा और 100 प्रतिशत तक बारिश हुई। इस बार कम बारिश के आसार हैं और मानसून भी देर से पहुंचेगा।