जानीखुर्द। लॉकडाउन का असर जानवरों पर दिखाई देने लगा है। इसके चलते गंगनहर एवं आसपास क्षेत्र में रहने वाले बंदर भी दुबले हो गए हैं। वे खाना नहीं मिलने की वजह से खेतों का रुख कर रहे हैं। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
लॉकडाउन से पहले गंगनहर पुल पर बंदरों को जमावड़ा रहता था। इसके अतिरिक्त नहर किनारे उनके कई ठिकाने थे। वहां सैकड़ों की संख्या में बंदर रहते थे। लॉकडाउन से पहले गंगनहर के रास्ते आने जाने वाले लोग इन्हें खाना एवं फल आदि खिलाते रहते थे। लॉकडाउन के चलते आवाजाही बंद हो जाने पर इन बंदरों के सामने खाने की समस्या पैदा हो गई है। ये बंदर इसी उम्मीद में नहर किनारे सड़क पर बैठे रहते हैं कि शायद कोई आए और कुछ खाने को दे। लॉकडाउन के कारण अब लोग नहर की ओर नहीं जा रहे हैं। ऐसे में बंदर भूखे रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों की मानें तो ये बंदर अब पहले जैसे नहीं दिखते हैं। जो बंदर पहले तंदरूस्त दिखाई देते थे वे अब दुबले पतले हो गए हैं। अधिकतर बंदरों ने खाने की तलाश में जंगल का रुख कर लिया है। जानकारों का मानना है कि इस समय खेतों में भी ऐसी कोई फसल नहीं हैं जिसे खाकर बंदर पेट भर सकें। जहां सब्जी की फसलें खड़ी हैं वहां बंदर नुकसान पहुंचा सकते हैं। आबादी में अधिकतर लोग घरों में कैद हैं। इस कारण बंदर के लिए खाने का अभाव बना हुआ है। वन्यजीव प्रेमी मुनेश, गौरव गुप्ता और सोनू शर्मा का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा रही है परंतु जानवरों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इनके लिए भी खाने की व्यवस्था करने हेतु लोगों को आगे आना चाहिए।