चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने चार साल पहले मुख्य परीक्षा की निगरानी के लिए तकनीक का सहारा लिया था। निजी कॉलेजों के कमरों में सीसीटीवी कैमरे लगवाकर उनकी निगरानी शुरू की थी। कुछ केंद्रों ने इसका तोड़ निकाल लिया है। वह कनेक्टिविटी की आड़ में निगरानी तंत्र को फेल करने में लगे हैं। इससे परीक्षा की शुचिता दाव पर लगी है। बागपत जिले से सबसे ज्यादा इस तरह की शिकायतें हैं।
विवि ने हाल में सात केंद्रों से एक दिन के लिंक गायब होने की विडियो रिकॉर्डिंग मांगी है। निगरानी तंत्र कितना मजबूत है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 17 कंप्यूटरों से मेरठ और सहारनपुर मंडल के 180 परीक्षा केंद्रों की निगरानी हो रही है।
सीसीएसयू की मुख्य परीक्षा 2017 एक मार्च से चल रही है। मेरठ और सहारनपुर मंडल में करीब 4.80 लाख ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्र-छात्राएं परीक्षा दे रहे हैं। विवि निजी कॉलेजों को इस शर्त के साथ परीक्षा केंद्र बनाता है कि उनके यहां कमरों में सीसीटीवी लगा होगा। कॉलेज सीसीटीवी का डीवीआर लिंक विवि को देंगे। जिससे इंटरनेट की मदद से ऑनलाइन लाइव परीक्षा का हाल देखा जा सके। अगर कहीं कोई नकल की हरकत दिखती है तो उसे रोका जा सके। निगरानी के लिए विवि ने कैंपस में सर छोटूराम इंस्टीट्यूट में कंट्रोल रूम बनाया है। कंट्रोल रूम में 17 कंप्यूटर से 180 परीक्षा केंद्रों की निगरानी की जा रही है। एक परीक्षा केंद्र पर 10 या उससे अधिक कमरों में परीक्षा हो रही होती है। ऐसे में कंट्रोल रूम में संसाधन की संख्या ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। एक मॉनिटर पर एक साथ कई कमरे की विडियो दिखती है। बीच-बीच में टीम बदलाव करके देखते रहती है। फिर भी सब सेंटर और कमरों पर लगातार नजर बनाए रखना आसान नहीं है।
तीनों पाली में एक ही स्टॉफ
परीक्षा तीन पालियों में हो रही है। तीनों पालियों में अधिकांश एक ही स्टॉफ ड्यूटी दे रहा है। पहली पाली सुबह सात बजे शुरू होती है। तीसरी पाली शाम पांच बजे खत्म होती है। ऐसे में स्टॉफ द्वारा लगातार कितनी मुस्तैदी दिखाई जा सकती है, यह समझा जा सकता है। ड्यूटी देने वालों में अधिकांश क्लर्क स्टॉफ है। शिक्षकों की ड्यूटी लगी है, लेकिन वह कम हैं।
बागपत में नकल की बू
डीवीआर लिंक गायब होने की सबसे ज्यादा शिकायत बागपत जिले से आ रही हैं। सूत्रों की मानें तो यहां नकल कराने के लिए कनेक्टिविटी की समस्या बताकर खेल किया जा रहा है। हालांकि विवि उस दिन की विडियो रिकॉर्डिंग मांगता है। लेकिन केंद्र अपनी मनमर्जी चला रहे हैं। पहले भी बागपत जिले में सामूहिक नकल कराने को लेकर केंद्र डिबार किए गए हैं। दूसरे जिलों से भी कुछ केंद्रों की कनेक्टिविटी की समस्या लगातार आ रही है। यह समस्या बताने वाले गिने चुने केंद्र हैं।
फ्लाइंग स्क्वॉयड से नहीं तालमेल
कंट्रोल रूम में जिस स्टॉफ की ड्यूटी लगाई गई है, अगर उसको कमरों में नकल होने की हरकत नजर आती है तो वह फोन पर तुरंत केंद्र के सीनियर सुपरिटेंडेंट को सूचित करता है। उनके फोन नंबर कंट्रोल रूम में हैं। हर जिले के लिए बनाए गए फ्लाइंग स्क्वॉयड से कंट्रोल रूम का तालमेल नहीं है। वह छापेमारी अपनी अलग करते हैं।
10 कॉलेजों ने नहीं भेजे लिंक
प्राइवेट परीक्षा केंद्रों में 10 सेंटर ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक डीवीआर लिंक ही नहीं भेजा है। वहां परीक्षा का क्या हाल होगा, यह समझा जा सकता है। परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि सभी केंद्रों से डीवीआर लिंक आ गए हैं।
परीक्षा नियंत्रक, सीसीएसयू नारायण प्रसाद ने बताया कि जिस केंद्र के डीवीआर लिंक में कनेक्टिविटी की समस्या रहती है, उस दिन की विडियो रिकॉर्डिंग मंगाई जाती है। कनेक्टिविटी की समस्या कुछ केंद्रों की ओर से आ रही है। कंट्रोल रूम को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा। नकल रोकने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। जिन केंद्रों के खिलाफ रिपोर्ट या नकल के सबूत मिलेंगे, उनको डिबार किया जाएगा।