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मनी लॉन्ड्रिंग मामला: CCSU के पूर्व कुलपति की तीन करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त

Sat, 20 Jul 2024 03:04 PM IST
Dimple Sirohi अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ

सार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जोनल कार्यालय ने मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. रामपाल सिंह की 3.21 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त कर लिया है।
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CCSU, सीसीएसयू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जोनल कार्यालय ने मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. रामपाल सिंह की 3.21 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त कर लिया है।ईडी ने बदायूं और बरेली में रामपाल सिंह की आरपी सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट की भूमि व दो मंजिला आवासीय भवन को जब्त किया है। ईडी ने पूर्व कुलपति के खिलाफ विजिलेंस द्वारा दर्ज मुकदमे के आधार पर मनी लांड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।

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बता दें कि विजिलेंस ने आरपी सिंह के खिलाफ जांच के बाद राज्य सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में उन्हें 2003 से 2005 की अवधि के दौरान विभिन्न अनियमितताओं का दोषी पाया था। इनमें सीपीएमटी (कंबाइंड प्री-मेडिकल टेस्ट) प्रवेश परीक्षा-2004 के आयोजन में अनियमितताएं, सीसीएस विश्वविद्यालय मेरठ में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति और विश्वविद्यालयों की कई प्रक्रियाओं और मानदंडों का उल्लंघन करते हुए कॉलेजों को संबद्धता प्रदान करना आदि शामिल था। साथ ही, उन पर विश्वविद्यालय के कुलपति के उनके कार्यकाल के दौरान विभिन्न अनियमितताओं का दोषी ठहराया गया था। 

ईडी की जांच में सामने आया कि आरपी सिंह विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त रहे। उन्होंने विश्वविद्यालयों की कई प्रक्रियाओं और मानदंडों का उल्लंघन किया, जिससे सरकार को 3.64 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कुलपति रहने के दौरान उन्होंने तमाम चल-अचल संपत्तियां अर्जित की थी, जिनकी कीमत 3.21 करोड़ है। ईडी इस मामले की आगे जांच कर रहा है।  
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संदीप पहल की शिकायत पर हुई थी कार्रवाई 
सुप्रीमकोर्ट के एडवोकेट संदीप पहल ने तत्कालीन कुलपति के खिलाफ राजभवन में शिकायत की थी, जिसके बाद जांच में आरोप सही पाए जाने पर उनको बर्खास्त किया गया था। डॉ. पहल का कहना है कि इनके पास 50 करोड़ से ज्यादा की अवैध संपत्ति है, सारी जब्त की जानी चाहिए। 

कुलपति एसपी ओझा भी हुए थे बर्खास्त
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में आरपी सिंह के अलावा भी कई कुलपति जांच के घेरे में रहे हैं। पूर्व कुलपति एसपी ओझा भी सीडी कांड में बर्खास्त हुए थे। उनके खिलाफ अब भी जांच चल रही है। 

सीसीएसयू में दो मार्च 2003 को प्रो. आरपी सिंह ने कुलपति बने थे। कैंपस में वैसे तो तमाम कुलपतियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, लेकिन प्रो. आरपी सिंह के कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया था। ये तमाम शिकायतें राजभवन से लेकर राष्ट्रपति तक पहुंची तो जांच शुरू हुई थी। 

उच्च स्तरीय जांच में प्रो. आरपी सिंह द्वारा करोड़ों रुपये की घूस लेकर डेढ़ सौ से ज्यादा बीएड एवं दूसरे सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों को गलत तरह से मान्यता देने की बात सामने आई। आरपी सिंह के कार्यकाल में भवनों के ठेकों में भारी घपले हुए। नियुक्तियों में अनियमितताएं हुईं। सीपीएमटी की प्रवेश परीक्षा में अपने चहेते शिक्षक प्रो. हरेंद्र सिंह बालियान को एडवांस में एक करोड़ 40 लाख रुपये का पेमेंट करा दिया गया। 

अजमेर में घूस लेते पकड़े गए  
बर्खास्तगी के कई साल बाद आरपी सिंह को जोधपुर में कुलपति नियुक्त किया गया। इसके बाद उनको अजमेर में महर्षि दयानंद सरस्वती विवि कुलपति बनाया गया। सितंबर 2020 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने कुलपति प्रो. आरपी सिंह और उनके निजी गार्ड रणजीत सिंह को दो लाख 20 हजार की रिश्वत के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार किया। एसीबी जयपुर और अजमेर की टीमों ने नागौर के एक प्राइवेट कॉलेज में सीटें बढ़ाए जाने के मामले में ली गई घूस के मामले में कार्रवाई की।
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