संदीप पहल की शिकायत पर हुई थी कार्रवाई
सुप्रीमकोर्ट के एडवोकेट संदीप पहल ने तत्कालीन कुलपति के खिलाफ राजभवन में शिकायत की थी, जिसके बाद जांच में आरोप सही पाए जाने पर उनको बर्खास्त किया गया था। डॉ. पहल का कहना है कि इनके पास 50 करोड़ से ज्यादा की अवैध संपत्ति है, सारी जब्त की जानी चाहिए।
कुलपति एसपी ओझा भी हुए थे बर्खास्त
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में आरपी सिंह के अलावा भी कई कुलपति जांच के घेरे में रहे हैं। पूर्व कुलपति एसपी ओझा भी सीडी कांड में बर्खास्त हुए थे। उनके खिलाफ अब भी जांच चल रही है।
सीसीएसयू में दो मार्च 2003 को प्रो. आरपी सिंह ने कुलपति बने थे। कैंपस में वैसे तो तमाम कुलपतियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, लेकिन प्रो. आरपी सिंह के कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया था। ये तमाम शिकायतें राजभवन से लेकर राष्ट्रपति तक पहुंची तो जांच शुरू हुई थी।
उच्च स्तरीय जांच में प्रो. आरपी सिंह द्वारा करोड़ों रुपये की घूस लेकर डेढ़ सौ से ज्यादा बीएड एवं दूसरे सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों को गलत तरह से मान्यता देने की बात सामने आई। आरपी सिंह के कार्यकाल में भवनों के ठेकों में भारी घपले हुए। नियुक्तियों में अनियमितताएं हुईं। सीपीएमटी की प्रवेश परीक्षा में अपने चहेते शिक्षक प्रो. हरेंद्र सिंह बालियान को एडवांस में एक करोड़ 40 लाख रुपये का पेमेंट करा दिया गया।
अजमेर में घूस लेते पकड़े गए
बर्खास्तगी के कई साल बाद आरपी सिंह को जोधपुर में कुलपति नियुक्त किया गया। इसके बाद उनको अजमेर में महर्षि दयानंद सरस्वती विवि कुलपति बनाया गया। सितंबर 2020 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने कुलपति प्रो. आरपी सिंह और उनके निजी गार्ड रणजीत सिंह को दो लाख 20 हजार की रिश्वत के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार किया। एसीबी जयपुर और अजमेर की टीमों ने नागौर के एक प्राइवेट कॉलेज में सीटें बढ़ाए जाने के मामले में ली गई घूस के मामले में कार्रवाई की।