यूपी एटीएस की गिरफ्त में आया जैश-ए-मोहम्मद से प्रभावित बिहार के पूर्णिया निवासी मोहम्मद जफर आठ साल मेरठ में रहा था। उसने यहां कोतवाली क्षेत्र के एक मदरसे में रहकर पढ़ाई की थी। बीते 14 अगस्त को एटीएस ने हापुड़ के शेरपुर गांव स्थित मस्जिद के पास से दो संदिग्धों को हिरासत में लिया था। आशंका जताई जा रही है कि संदिग्ध मोहम्मद जफर के करीबी हो सकते हैं। मौके पर मिली बाइक सरधना निवासी कादर अब्दुल सत्तार की थी।
कोतवाली क्षेत्र के मदरसे में जफर वर्ष 2016 से 2023 तक पढ़ा था। उस दौरान वह मेरठ में ही रहता था। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। शुरुआत में मस्जिद में मदरसा चलने की सूचना मिली थी। वहां जाकर पड़ताल की गई तो मस्जिद में एक मुअज्जिन मिले।
उनका कहना था कि इमाम इस दौरान मस्जिद में नहीं हैं। वही इस संबंध में जानकारी दे पाएंगे। इमाम से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि मोहम्मद जफर के बारे में मदरसे के शिक्षक जानकारी दे पाएंगे। यह भी पता चला कि मदरसा मस्जिद से कुछ दूर संचालित होता है।
मदरसे के शिक्षक से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि वह 12 वर्ष से मदरसे में शिक्षक हैं। हालांकि उन्होंने जफर के संबंध में जानकारी से अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि उसके बारे में जानकारी जुटाने के लिए रजिस्टर देखने होंगे। मंगलवार को इस संबंध में जानकारी दे पाएंगे। पुलिस भी इस मामले से अनभिज्ञता जताती रही।
आतंकी कनेक्शन और मेरठ का पुराना नाता
आतंकी कनेक्शन रखने वाले आरोपियों का वेस्ट यूपी और मेरठ से पुराना नाता है। इस साल भी कई मामले सामने आ चुके हैं। पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और सरदार उर्फ सरफराज ने इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक के माध्यम से स्लीपर सेल तैयार कर रहे हैं।
इस वर्ष 13 मार्च को अंबाला में मेरठ के लिसाड़ी गेट निवासी अनस समेत तीन युवकों की गिरफ्तारी हुई थी। अनस दो साल पहले चंडीगढ़ में पाकिस्तानी नेटवर्क के संपर्क में आया था। इसके बाद पुलिस और एटीएस अलग-अलग स्थानों से 25 से अधिक मेरठ से संबंध रखने वाले युवाओं की गिरफ्तारी कर चुकी है।
कर्नाटक, कानपुर के बाद हापुड़ पहुंची एटीएस
स्वतंत्रता दिवस से पूर्व 13 अगस्त को एटीएस ने कर्नाटक के कलबुर्गी स्थित एक मीट फैक्टरी में काम करने वाले तालुक के उपलम गांव के पास से उत्तर प्रदेश के सीतापुर निवासी मोहम्मद समीर और सलमान को गिरफ्तार किया था। एटीएस ने समीर के कमरे से कुछ नक्शे भी बरामद किए थे।
इसके बाद कानपुर देहात के अकबरपुर से संदिग्ध गतिविधियां मिलने पर कानपुर देहात के अकबरपुर क्षेत्र से भाई-बहन और हापुड़ के शेरपुर स्थित मस्जिद के पास से दो संदिग्धों को हिरासत में लेने का मामला सामने आया था। समीर और सलमान उत्तर प्रदेश के कुछ अन्य लोगों से संपर्क में थे। आशंका है कि जफर का सुराग उनसे पूछताछ के बाद एटीएस को मिला है।
सरधना की बाइक कैसे पहुंची हापुड़... जवाब बाकी
14 अगस्त को हापुड़ के शेरपुर गांव से दो संदिग्धों को हिरासत में लेने के बाद मौके से बाइक बरामद की गई थी। पकड़े गए संदिग्ध इसी बाइक पर सवार थे। एटीएस के पीछा करने पर वह मस्जिद की ओर भागे थे, तभी दबोच लिया गया था। कुछ लोगों ने बताया था कि ये मस्जिद के लिए चंदा एकत्रित कर रहे थे।
हापुड़ से पकड़े संदिग्धों के तार जफर से जुड़े होने की आशंका है लेकिन मौके से मिली सरधना निवासी कादर अब्दुल सत्तार के नाम से रजिस्टर्ड बाइक के बारे में भी पुलिस ठोस जानकारी नहीं दे पाई है। यह बाइक वहां कैसे पहुंची। इसका जवाब मिलना भी बाकी है।
सीओ कोतवाली संग्राम सिंह का कहना है कि उन्हें आधिकारिक रूप से मामले की जानकारी नहीं मिली है। एटीएस ने भी उनसे संपर्क नहीं किया है। हालांकि कोतवाली पुलिस जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।
सोशल मीडिया पर खंगालता था जेहादी सामग्री
मेरठ के मदरसे में पढ़ाई के दौरान ही मोहम्मद जफर के मन में जेहादी विचार पनप रहे थे। तभी वह आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और उसके प्रमुख मसूद अजहर के बारे में पढ़ने लगा था। इसके बाद वह जेहाद और मुजाहिदों की शहादत से जुड़ी सामग्री देखने-पढ़ने लगा। धीरे-धीरे वह खुद मुजाहिद बनने की सोचने लगा। उसका मकसद ही मुजाहिद बनना था। एटीएस की तफ्तीश में इसका खुलासा हुआ है।
एटीएस के मुताबिक जफर केवल जेहादी भाषण और सामग्री तक सीमित नहीं रहा। वह सोशल मीडिया पर यह भी देखता था कि मुजाहिद कैसे बना जाता है और इसके बाद क्या करना होता है। वह जेहादी विचारधारा से जुड़ी सामग्री लगातार तलाशता और देखता था। मसूद अजहर के भाषणों से प्रभावित होकर उसके मन में मुजाहिद बनने की इच्छा और मजबूत होती गई। मोबाइल में तमाम ऐसे भड़काऊ भाषणों के वीडियो मिले हैं।
पाकिस्तानी व्हाट्सएप ग्रुपों से भी जुड़ा था
पूछताछ में उसने खुद स्वीकारा कि वह मसूद अजहर से प्रभावित है। यहां तक कि उसका कहना था वह एक बार मसूद से मिलना भी चाहता था। उसके मोबाइल फोन की जांच में कई पाकिस्तानी जेहादी व्हाट्सएप ग्रुप मिले हैं। इन ग्रुपों में जेहाद और चंदे से जुड़ी उसकी बातचीत भी मिली। वह सोशल मीडिया के जरिये जेहाद और खिलाफत से जुड़े बयान भी साझा करता था। फेसबुक पर वह चेहरा ढककर इस तरह की सामग्री पोस्ट करता था।
ग्रुप से जुड़कर हैंडलर तक पहुंचा
जांच के दौरान सामने आया कि सोशल मीडिया पर जेहादी सामग्री देखने के बाद जफर जैश-ए-मोहम्मद के जेहादी ग्रुप से जुड़ गया। इसके बाद वह पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में आया। आरोपी के मोबाइल में कुछ संवेदनशील जगहों के वीडियो व फुटेज भी मिले हैं। जिसकी तस्दीक एटीएस कर रही है। अंदेशा है कि कहीं हैंडलर्स के कहने पर ये वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजे गए हैं।