कांग्रेस ने चौधरी साहब को प्रधानमंत्री पद से हटाया था
सर छोटूराम को इस्तीफा देने को कर दिया था मजबूर
अजित सिंह कभी मेरे पास किसान के मुद्दे लेकर नहीं आए
संकल्प रैली में मुजफ्फरनगर, बागपत और मेरठ से भी किसान पहुंचे। लोकसभा की इन तीनों ही सीटों पर किसानों की अच्छी-खासी संख्या है। प्रधानमंत्री ने रैली में इस पर खासा फोकस रखा। साथ ही कहा कि चौधरी अजित सिंह इन पांच साल में कभी मेरे पास किसानों के मुद्दों को लेकर नहीं आए, न ही कोई चिट्ठी लिखी।
उन्होंने भाषण की शुरुआत में ही कहा कि हम सबके आदरणीय चौधरी चरण सिंह जी को मैं नमन करता हूं। उन्होंने देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। चौधरी साहब देश के उन सपूतों में से थे, जिन्होंने देश की राजनीति को खेत-खलिहान और किसान पर ध्यान देने के लिए मजबूर कर दिया। आज चौधरी चरण सिंह होते, तो कितने दुखी होते। जिस गरीब किसान के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया, उसे सपा, बसपा और कांग्रेस द्वारा बहुत नुकसान पहुंचाया गया। देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और इंदिरा गांधी के बीच सियासी मनमुटाव रहा है। साल 1967 में दोनों के रिश्तों में इतनी खटास आ गई थी कि यूपी कांग्रेस की सरकार गिर गई और विपक्षी खेमे का नेतृत्व कर रहे चौधरी चरण सिंह सूबे के मुख्यमंत्री बन गए थे। इसके बाद वह प्रधानमंत्री बने, लेकिन बहुमत नहीं मिलने के कारण कुर्सी छोड़ देनी पड़ी थी।
मोदी ने कहा कि कांग्रेस की तो किसान नेताओं से पहले से ही दुश्मनी रही है। यही वजह रही कि आपातकाल के दौरान चौधरी साहब को जेल में डाल दिया था। चौधरी साहब को प्रधानमंत्री पद से हटाने में भी कांग्रेस की बड़ी भूमिका थी। चौधरी चरण के बाद उन्होंने सर छोटूराम के बारे में कहा कि मत भूलिए देश के एक और किसान नेता हरियाणा के सर छोटूराम जी के साथ भी कांग्रेस ने यही किया था। वे किसानों के लिए काम करना चाहते थे, लेकिन इस कांग्रेस ने उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया था। ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले साल मुझे रोहतक में सर छोटूराम जी की सबसे ऊंची प्रतिमा का लोकार्पण करने का मौका मिला। भाजपा सरकार चौधरी चरण सिंह और दीनबंधु छोटूराम के सपनों को पूरा करने के लिए काम कर रही है। देश का किसान, मजदूर सशक्त होगा तो देश मजबूत होगा।