आधुनिक कृषि यंत्रों के साथ खेती के लिए मशहूर पंजाब की तर्ज पर अब पश्चिमी यूपी के किसान भी तकनीक के साथ कदमताल करने लगे हैं। खेत की जुताई के लिए अब बड़े ट्रैक्टरों के साथ मिनी ट्रैक्टर भी किसानों को भा रहे हैं। इसके अलावा रोटरी टिलर, पावर हैरो के साथ पावर टिलर भी किसानों के घेर की शान बनने लगे हैं। इसके अलावा गेहूं, धान, जौ, जई आदि फसलों की कटाई आसानी से करने वाली मशीन रीपर बाइंडर भी किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। इसकी न केवल खरीद होने लगी है, बल्कि काफी किसान इसके बारे में जानकारी करने के लिए कृषि यंत्र केंद्रों पर पहुंच रहे हैं।
किसानों को भाया मिनी ट्रैक्टर
एक समय था जब किसानों को बाग आदि की जुताई-खुदाई करने के लिए ट्रैक्टरों के साइलेंसर उतारने पड़ते थे या मैसी फर्ग्यूसन टाइप ट्रैक्टरों का इस्तेमाल करना पड़ता था। लेकिन अब मिनी ट्रैक्टर ने इस कमी को पूरा कर दिया है। ट्रैक्टर बनाने वाली अधिकतर कंपनियों ने मिनी ट्रैक्टर बाजार में उतार दिए हैं। जुताई और ढुलाई श्रेणी में आने वाले मिनी ट्रैक्टरों की कीमत 2.5 लाख से 4.5 लाख तक है। जुताई वाले मिनी ट्रैक्टर 24 से 26 एचपी के फोर बाई फोर तकनीक पर आधारित है। वहीं ढुलाई वाले ट्रैक्टरों की क्षमता 15 से 18 एचपी है। किसानों को मिनी ट्रैैक्टर इसलिए भी भा रहा है कि इसका जुताई खर्च कम है। यह एक घंटे में केवल 700 एमएल डीजल की खपत करता है। बैलों और भैसें की जगह किसान अब इस छोटे ट्रैक्टर को ही लेना पसंद कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि बैलों या भैंसों को बारह महीने खिलाना-पिलाने पर खर्च करना पड़ता है। ट्रैक्टर जब चलेगा तभी खर्च होगा।
आधुनिक कृषि यंत्रों की बढ़ रही खरीद
पहले जहां किसान खेत की जुताई के लिए परंपरागत हैरो और टिलर का इस्तेमाल करते थे वहीं अब इनकी जगह रोटरी टिलर (रोटावेटर), पावर हैरो ने ले ली है। रोटरी टिलर और पावर हैरो हर प्रकार की मिट्टी में काम करता है और इसका रखरखाव खर्च कम से कम है। इसके अलाव पावर टिलर (कल्टीवेटर कम वीडर) भी सर्वाधिक पसंद किया जा रहा है। इस उपकरण की मदद से गन्ना, कपास, मैंथा, फूल, पपीता और केला आदि के अलावा कतार वाली फसलों की निराई-गुड़ाई आसानी से की जा सकती है।
रीपर बाइंडर और मलचर बने आकर्षण का केंद्र
गेहूं काटने की मशीन रीपर बाइंडर और गन्ने की पत्ती व धान की पुआल आदि को काटने वाली मशीन मलचर भी किसानों की पसंद बनी है। रीपर बाइंडर के जरिये एक घंटे में पांच बीघा गेहूं, धान, जौ और जई की फसलों की कटाई व बंधाई की जा सकती है। मलचर के जरिये गन्ने की पत्ती व धान की पुआल को काटकर खेतों में ही फैला दिया जाता है। जो खाद में तब्दील होकर मिट्टी को उपजाऊ करता है। कृषि यंत्रों की खरीद पर सरकार अनुदान भी मुहैया करा रही है।
रीपर बाइंडर और पावर टिलर से होने वाली बचत
- एक एकड़ गेहूं की कटाई मजदूरी 150 किलो गेहूं -- कीमत 2700 रुपये
- रीपर बाइंडर से गेहूं की कटाई खर्च एक लीटर डीजल प्लस सुतली बंडल -- कीमत 600 रुपये
- किसान को फायदा -- 2100 रुपये प्रति एकड़
- एक एकड़ खेत की निराई-गुड़ाई मजदूरी -- 2400 रुपये
- पावर टिलर से निराई खर्च ढाई लीटर पेट्रोल - कीमत 200 रुपये
- किसान को फायदा -- 2200 रुपये
क्या बोले उद्यमी
पसंद बने आधुनिक यंत्र
ट्रैक्टरों के साथ आधुनिक कृषि यंत्र पश्चिमी यूपी के किसानों को खूब पसंद आ रहे हैं। किसानों की मांग और जरूरतों को देखते हुए कंपनी नई-नई तकनीक का इस्तेमाल कर यंत्र बना रही है। इन यंत्रों के माध्यम से न केवल खेती खर्च कम हुआ है बल्कि किसान किराया कर अतिरिक्त कमाई भी कर लेते हैं। -राजेंद्र मेहता, चेयरमैन शिव शक्ति इंप्लीमेंट्स (महिंद्रा ट्रैक्टर एजेंसी)
छोटे ट्रैक्टर भी खरीद रहे
बैलोें और भैंसे आदि के खर्च से बचने के लिए छोटे किसान मिनी ट्रैक्टर पसंद कर रहे हैं। बड़ी जोत वाले किसान भी बड़े ट्रैक्टर के साथ मिनी ट्रैक्टर भी ले रहे हैं। ये जुताई और ढुलाई श्रेणी में अलग-अलग आते हैं। - एम सईद, एमडी सईद एंटरप्राइजेज (फार्मट्रैक ट्रैक्टर)