मेरठ। शुक्रवार शाम छह बजे महानगर के एक बड़े हिस्से में ब्लैकआउट हो गया। डीएन कॉलेज में अचानक अफरातफरी मच गई। सायरन गूंजने लगा। आग और धुएं के बीच लोग जान बचाने के लिए दीवारों पर चढ़ने लगे। चारों तरफ सिर्फ बचाओ-बचाओ का शोर गूंज रहा था। मदद के लिए लोग बदहवास दौड़ रहे थे, कई लोग चोटिल भी दिख रहे थे।
...लेकिन घबराइए नहीं, यह कोई असली हवाई हमला या दुर्घटना नहीं था। चंद मिनटों में ही यह शोर थम गया था। दरअसल, यह प्रशासन और सिविल डिफेंस की एक मॉकड्रिल थी। इस मॉकड्रिल के जरिये जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने परखा कि अगर सच में हवाई हमला हुआ तो मेरठ कितना तैयार है। एडीएम सिटी बृजेश सिंह ने खुद मौके पर मौजूद लोगों को समझाया कि हवाई हमले जैसी आपात स्थिति में जान कैसे बचाई जाए। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में तीव्र ध्वनि वाला चेतावनी सायरन बजाया जाता है। यह सायरन एक विशेष लय में बजता है जिसमें आवाज पहले धीरे-धीरे तेज होती है और फिर धीरे-धीरे कम हो जाती है। यह चेतावनी प्रणाली आम नागरिकों को संभावित खतरे के प्रति सतर्क करने के लिए उपयोग की जाती है।
मॉकड्रिल के दौरान डीएम डॉ. वीके सिंह ने लोगों से कहा कि सायरन सुनते ही खुले आसमान के नीचे न रहें। तुरंत बेसमेंट या किसी मजबूत छत के नीचे पनाह लें और जब तक ग्रीन सिग्नल न मिले, बाहर न निकलें। उन्होंने बताया कि दुश्मन के विमान रोशनी देखकर निशाना बनाते हैं, इसलिए बिजली काटी गई है ताकि अंधेरे में दुश्मन को जगह की पहचान न हो सके। इस पूरे ऑपरेशन में विद्युत विभाग, मेडिकल टीम, फायर ब्रिगेड, एनसीसी, होमगार्ड और भारत स्काउट के जवान मुस्तैदी से डटे दिखे।
मॉकड्रिल 10 मिनट की, लेकिन अंधेरा 2 घंटे का
जहां एक तरफ प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रहा है वहीं शहर का एक दूसरा सच भी सामने आ रहा है। प्रशासन का दावा था कि यह सीमित समय का ब्लैकआउट है लेकिन हकीकत में दो घंटे तक लोग अंधेरे में रहे। महानगर के पल्लवपुरम, गंगानगर, दिल्ली रोड समेत कई इलाकों में रात के आठ बजे तक अंधेरा छाया रहा। घंटाघर और मेरठ मॉल फीडर को शाम छह से 6:10 तक बंद करने का प्लान था लेकिन 10 मिनट की यह मॉकड्रिल लोगों के लिए 2 घंटे की मुसीबत बन गई। घंटाघर, बागपत रोड, रेलवे रोड और मेरठ मॉल के आसपास के इलाकों में गहरा अंधेरा पसरा रहा। लोग बिजलीघरों पर फोन घनघनाते रहे, नाराजगी जताते रहे, लेकिन बिजली व्यवस्था मॉकड्रिल पूरी तरह खत्म होने के बाद ही सुचारू हो सकी।