मेरठ में कृषि विश्वविद्यालय में मतगणना
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पहली वरीयता से फैसला नहीं होने पर क्या होता है?
माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट के जिला मंत्री डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि यदि पहली वरीयता के मतों से किसी उम्मीदवार की जीत तय नहीं होती है, तो सबसे कम पहली वरीयता के वोट पाने वाले उम्मीदवार के मतपत्रों की अगली वरीयताओं के आधार पर गिनती की जाती है।
इस प्रक्रिया में देखा जाता है कि बाहर हुए उम्मीदवार को पहली वरीयता देने वाले मतदाताओं ने दूसरी वरीयता किस उम्मीदवार को दी है। नियमानुसार मान्य दूसरी वरीयता के मत संबंधित उम्मीदवारों के मतों में जोड़े जाते हैं। इसके बाद फिर से देखा जाता है कि क्या किसी उम्मीदवार ने निर्धारित कोटा हासिल कर लिया है।
तीसरी और आगे की वरीयता से भी तय हो सकता है परिणाम
यदि दूसरी वरीयता के मतों को जोड़ने के बाद भी कोई उम्मीदवार जीत के लिए जरूरी कोटा हासिल नहीं कर पाता है, तो मतगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। सबसे कम मत पाने वाले उम्मीदवार को बाहर करने और उसके मतपत्रों पर दर्ज अगली वरीयताओं पर विचार करने का क्रम नियमानुसार जारी रहता है।
इस तरह तीसरी और उसके बाद की वरीयताओं के मत भी परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मतगणना तब तक आगे बढ़ती है, जब तक किसी उम्मीदवार के निर्धारित कोटा हासिल करने या लागू निर्वाचन नियमों के तहत परिणाम तय होने की स्थिति नहीं बन जाती।
एमएलसी चुनाव में वरीयता आधारित मतगणना का उद्देश्य मतदाताओं की अगली पसंद को भी चुनावी प्रक्रिया में शामिल करना है। इसलिए इस चुनाव में केवल शुरुआती दौर में मिले मतों के आधार पर जीत-हार का अनुमान लगाना सही नहीं होता। अंतिम परिणाम मतगणना के निर्धारित नियमों और पूरी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होता है।