मुजफ्फरनगर पर फंसा पेच, रालोद को झटका
सपा-बसपा ने सिर्फ दो सीट अन्य दल के लिए छोड़ी है। ऐसे में चौधरी अजित सिंह के बागपत छोड़ कर मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारियों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। हालांकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से अभी भी वार्ता जारी है।
एक संभावना बची है कि वह अपने खाते से मुजफ्फरनगर सीट रालोद के लिए छोड़ दे। एक साल से रालोद ने खोई ताकत पाने में जुटा है। कैराना उपचुनाव में जीत से पार्टी का हौसला बढ़ा था। पार्टी ने संगठन को ही मजबूत नहीं किया, बल्कि जनता से सीधा संवाद किया।
रालोद अध्यक्ष ने बुढ़ाना, खतौली, लालूखेड़ी और मीरापुर में जन संवाद कार्यक्रम किए। पार्टी के जाट-मुस्लिम समीकरण को फिर से साधने की नीति पर फोकस किया। सपा के पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश की रालोद में एंट्री हुई। कैराना सीट से तबस्सुम बेगम को प्रत्याशी बनाना भी छोटे चौधरी की उसी सोच का नतीजा था। जयंत चौधरी ने भी गांव में दौरे कर दंगा पीड़ितों के दर्द को सुना।
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