वर्ष 2014 में जब लोकसभा चुनाव हुआ था, तो सीधा मुकाबला भाजपा प्रत्याशी राघव लखनपाल शर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद के बीच था। भाजपा प्रत्याशी राघव लखनपाल शर्मा ने 4,72,999 वोट लेकर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद 4,07,909 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे।
बसपा प्रत्याशी जगदीश सिंह राणा 2,35,033 वोट लेकर तीसरे और सपा प्रत्याशी शाजान मसूद 52,765 वोटों के साथ चौथे नंबर पर रहे थे। सपा चौथे नंबर पर इसलिए चली गई थी, मुस्लिम मतदाताओं का रुझान कांग्रेस प्रत्याशी की तरफ हो गया था।
यदि 2014 के चुनाव में मिले सपा बसपा प्रत्याशियों को मिले वोटों को जोड़ा जाए तो यह 2,87,798 वोट बैठते हैं। यहां अहम बात यही है कि सपा-बसपा गठबंधन के बाद सहारनपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस की रणनीति क्या रहती है।
भीम आर्मी ने साफ की चुनावी रणनीति
सपा-बसपा का गठबंधन का अनुसूचित जाति - मुस्लिम गठजोड़ को परवान चढ़ाने पर जोर होगा। राजनीतिक लिहाज से सहारनपुर और आसपास के जिलों में भीम आर्मी की अहमियत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
रविवार को देहरादून रोड स्थित संत रविदास छात्रावास में भीम आर्मी भारत एकता मिशन का कार्यक्रम में भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर भी मौजूद रहे। रविवार को रैली में सभी मुद्दों पर चर्चा की गई और आगामी चुनाव को लेकर क्या रणनीति तय की गई।
यहां उन्होंने कहा कि भीम आर्मी गठबंधन को सपोर्ट करेगी। उन्होंने कहा कि मायावती का नाम नहीं लेंगे क्योंकि वह बुरा मान जाती हैं। चंद्रशेखर के मुताबिक व न तो चुनाव लड़ना चाहते हैं और न ही टिकट चाहते हैं।
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