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मिशन 2019: नगमा छोड़ रहीं मैदान, स्थानीय कांग्रेसियों ने छेड़ी टिकट की तान

Wed, 06 Feb 2019 01:53 PM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
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प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाने से कांग्रेसियों का उत्साह हिलोरे मार रहा है। साथ ही फिल्म अभिनेत्री नगमा के मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट से दावा छोड़ने पर स्थानीय कांग्रेसी नेताओं ने टिकट की तान छेड़ दी है। टिकट के इच्छुक नेताओं ने अपना बायोडाटा और अखबारों में छपी खबरों की फाइल अपने नजदीकी एवं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भेजनी शुरू कर दी है। 

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मेरठ-हापुड़ सीट पिछले दो लोकसभा चुनावों से भाजपा के पास है। 2014 में कांग्रेस ने यहां से फिल्म अभिनेत्री नगमा को उतारा था। लेकिन काफी प्रचार करने के बाद भी नगमा केवल 42 हजार 911 वोट ही हासिल कर पाई थीं। भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल 5 लाख 32 हजार 981 वोट लेकर दूसरी बार विजयी हुए थे।

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बसपा से शाहिद अखलाक 3 लाख वोट लेकर दूसरे और सपा से शाहिद मंजूर 2 लाख 11 हजार 759 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार परिस्थिति बदल चुकी है। सपा और बसपा एक मंच पर आ चुके हैं और रालोद भी देर सवेर सीटों का बंटवारा होने पर गठबंधन के साथ ही ताल ठोक सकता है।

इस बीच मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्यों मेें सरकार बनाने के बाद कांग्रेसी लोकसभा चुनावों में भी फतह हासिल करने का दंभ भर रहे हैं। वहीं प्रियंका गांधी की सक्रिय राजनीति में एंट्री हो गई है। पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी है, जिसमें 42 सीटें शामिल हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मध्यप्रदेश में पार्टी को जीत का स्वाद चखाने में महती भूमिका निभाने वाले युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी यूपी का प्रभारी बनाया गया है। 

इस सबके बीच पार्टी ने गठबंधन से अलग रहकर राज्य की सभी 80 सीटों पर पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। मेरठ-हापुड़ सीट से चुनाव लड़ चुकीं नगमा ने इस बार यहां की बजाय मुंबई की किसी सीट से किस्मत आजमाने का निर्णय लिया है। उनके हटने पर पार्टी के स्थानीय नेताओं की उमंगें फिर से जागने लगी हैं।

इसमें पूर्व मुख्यमंत्री बनारसी दास के बेटे पूर्व एमएलसी हरेंद्र अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दयानंद गुप्ता, पार्टी की लीगल सेल के राष्ट्रीय सचिव विपुल माहेश्वरी और युवा किसान नेता अभिमन्यु त्यागी आदि का नाम आगे चल रहा है।

वोटों के जातीय समीकरणों को देखते हुए गठबंधन से मुसलिम प्रत्याशी उतरने पर पार्टी की तरफ से किसी मुसलिम नेता को उतारे जाने की संभावना कम नजर आ रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी ऐसे नेता को उतारेगी, जो गठबंधन की मौजूदगी के बीच भाजपा की घेराबंदी कर जीत हासिल कर सके। 
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सपा और बसपा में हाशिये पर चल रहे कुछ कद्दावर नेता भी कांग्रेस का दामन थाम लोकसभा का टिकट हथिया सकते हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि गठबंधन होने के बाद ऐसे नेता कांग्रेस में शामिल होने के लिए प्रयासरत हैं। ऐसी स्थिति में टिकट मांगने वालों की लिस्ट लंबी हो सकती है।

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