लोगों ने समस्याएं बताते वक्त सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि सूचनाएं मिल रही थी कि गंभीर मरीजों को कोविड की वजह से इलाज नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल प्रशासन से गर्भवती महिलाओं और अब तक कितने पॉजिटिव मिले, कितने भर्ती हुए, कितनों की मौत हुई और ओपीडी में अभी तक कितने मरीज देखें गए। इन सभी की सूचनाएं मांगी है। वहीं रिकॉर्ड को लेकर अस्पताल के अधिकारी एक दूसरे को देखने लगे तो मंत्री ने अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों को हड़काया। कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि सारा रिकॉर्ड अपडेट होना चाहिए।
उधर, इमरजेंसी से बाहर किए गए तीमारदारों की मंत्री सुरेश खन्ना ने समस्याएं सुनी। इन लोगों का आरोप है कि दवाई बाहर से लेनी पड़ रही है। साथ ही कहा कि पीपीई किट खुद बाहर से ही लानी पड़ रही है। मंत्री से लोगों ने शिकायत की कि इमरजेंसी में सफाई के लिए भी 200 रुपये मांगे जा रहे हैं। मंत्री ने कहा जल्द यह परेशानी दूर होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द कार्रवाई करेंगे। उन्होंने सीएमओ को कहा, लोगों की समस्या का जल्द से जल्द समाधान करें।
वहीं मेडिकल इमरजेंसी के बाहर कोरोना सस्पेक्ट मरीजों के परिजन मंत्री सुरेश खन्ना को अपनी समस्याएं बताते समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भूल गए।
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