माछरा/मुंडाली। अत्यधिक ठंड पड़ने से जहां आदमी एवं पशु प्रभावित हैं। इससे दुधारू पशुओं का दूध भी घट रहा है। वहीं, फसलें भी प्रभावित हो रही हैं। हालांकि गेहूं की फसल के लिए ठंड लाभदायक है।
एक सप्ताह से अधिक समय से भारी ठंड पड़ रही है। इससे सरसों एवं आलू की फसल भी प्रभावित हो रही है। वहीं, पशुपालक प्रदीप शर्मा, प्रमोद कुमार, सचिन कश्यप आदि का कहना है कि वह पशुपालन करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। ठंड अधिक होने के कारण गाय-भैंस का दूध घट रहा है। हालांकि ठंड से बचाव के लिए गुड़ एवं अजवाइन आदि खिला रहे हैं। जिससे ठंड का प्रभाव न पड़े और दूध पर असर न पडे़। पशुओं के नीचे सूखा रखने के लिए गन्ने की पत्ती तथा गन्ना कोल्हू से खोई का बरूदा लाकर डाला जाता है। इसे दो दिन बाद पुन: बदल दिया जाता है। कमरे में गर्मी रखने के लिए हैलोजन बल्ब लगा रखे हैं। जिससे गर्मी बनी रहे और पशु चिकित्सकों से भी सलाह लेकर समय-समय पर दवा दे रहे हैं।
उधर, पशु चिकित्साधिकारी माछरा डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि सर्दी में पशुओं में दुग्ध उत्पादन कम हो जाता है। इसकी वजह सर्दी में पशु द्वारा कम पानी पीना रहता है। इसलिए पशु को थोड़ा-थोड़ा नमक देते रहें। अत्यधिक सर्दी पशुओं की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। पशुओं को अतिरिक्त विटामिन एवं खनिज लवण निरंतर रूप से देने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। पशुओं को गुड़ अवश्य दें। गुड़ ऊर्जा का अच्छा स्रोत माना जाता है। पशुओं को जहां बांधा जाता है उनके नीचे सुखी बिछावन का प्रयोग करें। उसे दो-तीन दिन के अंतराल में बदलते रहें। पशुओं के थन या अयन में किसी भी प्रकार का बदलाव होने पर पशु चिकित्सक को दिखाएं। यदि लापरवाही बरती गई पशु बीमार हो जाता है तथा दूध उत्पादन भी घट जाता है।