प्रवासी पक्षियों को जिले की धरती रास आ गई है। इस बार जिले में प्रवास करने वाले पक्षियों की कुछ प्रजातियों में भारी इजाफा हुआ है। पक्षियों की संख्या में इजाफा होने से वन विभाग के अधिकारी भी खुश हैं। प्रवासी पक्षियों ने अभी तक जिले में डेरा जमा रखा है। मौसम में अभी भी ठंडक होने से इन पक्षियों ने गंगा किनारे अभी भी डेरा जमा रखा है। अधिक सर्दी वाले क्षेत्रों मध्य एशिया, साइबेरिया, यूरोप आदि क्षेत्रों के पक्षी नवंबर में बिजनौर गंगा किनारे आकर डेरा जमा लेते हैं। यहां पर पक्षियों को खाना ढूंढने में आसानी होती है। डेरटर, कॉमन कूट, कोरमोरेंट लार्ज, कोरमोरेंट लिटिल, ब्लैब ड्रोनिगो, ग्रे हैरोन, पोंड हैरोन, रेड वैटेड लेड लेपविंग, ट्री पाई, कैटल इगरेट, बारहैंडेट गीज, रेड वेंटेड बुलबुल आदि ने गंगा के किनारे अभी भी डेरा डाल रखा है।
अभी तक गंगा किनारे ही डेरा डाल रखा है
बिजनौर में प्रवासी पक्षियों का बसेरा
ग्रे लैग गीज, ग्र हैरोन, कोरमोरेंट लार्ज, ओपन विल्ड स्टोक आदि के बड़े बड़े झुंड खादर में गंगा किनारे आसानी से दिख जाते हैं। इनमें से कुछ प्रजातियों के पक्षियों की संख्या तो ढाई हजार से अधिक है। बीते साल मौसम गरम होने के कारण प्रवासी पक्षियों ने अपने ठिकानों के लिए फरवरी में ही उड़ान भरनी शुरू कर दी थी। लेकिन इस साल अभी तक मौसम में ठंडक होने से इन पक्षियों ने अभी तक गंगा किनारे ही डेरा डाल रखा है। पक्षियों की संख्या बढने से वन विभाग के अधिकारी भी गदगद नजर आ रहे हैं। डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक प्रवासी पक्षियों की कुछ प्रजातियों में इजाफा हो रहा है। कुछ नई प्रजाति भी इस साल देखने को मिली हैं। हो सकता है अगले साल प्रवासी पक्षियों की संख्या में और इजाफा हो जाए।
कर्नाटक के गजराज को कोई गम नहीं
हाथियों को कड़ी सुरक्षा में रखा गया
कालागढ़। कर्नाटक से आए हाथियों को कड़ी सुरक्षा में रखा गया है। हालांकि ऐलीफेंट कैंप में बाहरी लोगों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक अमित वर्मा ने बताया कि ऐलीफेंट कैंप में नर हाथी ने बच्चे को जो स्नेह दिया, वह किसी को भी भावविभोर कर सकता है। कैंप में हाथी जमकर मौजमस्ती कर रहे हैं।